
सुधीर मुनगंटीवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Chandrapur Municipal Corporation Election: चंद्रपुर जिले की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मंत्री और स्थानीय विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आगामी महानगर पालिका चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद स्थानीय स्तर पर एक ‘बड़ा ऑपरेशन’ चलाया जाएगा।
मुनगंटीवार का यह बयान उस समय आया है जब पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर विवाद चरम पर है। उन्होंने साफ कर दिया है कि पार्टी किसी की निजी जागीर नहीं है और अनुशासन तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विवाद की मुख्य जड़ महानगर पालिका चुनाव के लिए उम्मीदवारों को दिए जाने वाले ‘एबी फॉर्म’ (AB Form) वितरण में हुई कथित धांधली है। आरोप है कि महानगर जिलाध्यक्ष सुभाष कासनगोट्टूवार ने प्रदेश भाजपा द्वारा तय की गई आधिकारिक सूची में हेरफेर किया और अपनी मर्जी के उम्मीदवारों को फॉर्म बांट दिए।
इस अनुशासनहीनता को प्रदेश नेतृत्व ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। इसी के परिणाम स्वरूप, प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने तत्काल प्रभाव से कासनगोट्टूवार को उनके पद से मुक्त कर दिया। इस कार्रवाई ने जिले के अन्य पदाधिकारियों के बीच भी हड़कंप मचा दिया है।
चंद्रपुर भाजपा पिछले कुछ समय से दो ध्रुवों में बंटी नजर आ रही है। एक ओर दिग्गज नेता सुधीर मुनगंटीवार हैं, तो दूसरी ओर विधायक किशोर जोरगेवार। प्रदेश नेतृत्व ने आगामी चुनावों के लिए जोरगेवार को चुनाव प्रमुख नियुक्त किया था, जिसे मुनगंटीवार खेमे के लिए एक झटके के तौर पर देखा गया।
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इसी प्रतिद्वंद्विता के बीच कासनगोट्टूवार पर आरोप लगा कि उन्होंने जोरगेवार समर्थकों की जगह मुनगंटीवार समर्थकों के नाम सूची में शामिल किए। यह अंतर्कलह अब पार्टी के प्रदर्शन पर असर डाल सकती है, जिसे रोकने के लिए ‘बड़े ऑपरेशन’ की बात कही जा रही है।
सुधीर मुनगंटीवार के हालिया बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल चुनाव के मद्देनजर पार्टी शांत है, लेकिन नतीजे आते ही गाज गिरनी तय है। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन की सूची में व्यापक फेरबदल किए जाएंगे और उन चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा जिन्होंने निजी स्वार्थ के लिए पार्टी की मर्यादा लांघी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रपुर में भाजपा का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी इस गुटबाजी को कितनी कुशलता से नियंत्रित कर पाती है। फिलहाल, सभी की निगाहें चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाली संगठनात्मक सर्जिकल स्ट्राइक पर टिकी हैं।






