
विस्फोटक जब्त (सौजन्य-नवभारत)
Rajura Police: राजूरा तहसील की ग्राम पंचायत चुनाला अंतर्गत जोगापुर की ओर जाने वाले राष्ट्रीय महामार्ग का कार्य एक निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। इसी दौरान 8 जनवरी 2026 की रात एक अत्यंत गंभीर और खतरनाक मामला सामने आया। पर्यावरण से जुड़े कुछ जागरूक नागरिकों को रात में हाईवे परिसर में तेज रोशनी दिखाई दी, जिससे उन्हें पेड़ों की कटाई या किसी संदिग्ध गतिविधि की आशंका हुई।
जब वे वहां पहुंचे तो बिना नंबर प्लेट का एक महिंद्रा ट्रैक्टर खड़ा मिला, जबकि मजदूर ट्रैक्टर छोड़कर भाग चुके थे। केवल एक मजदूर मौके पर मौजूद था। ट्रैक्टर पर रखी सीमेंट की बोरियों की जांच करने पर उनमें एक्सप्लोडर और स्लरी एक्सप्लोसिव जैसे औद्योगिक विस्फोटक पाए गए। इससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर राजूरा पुलिस को सूचना दी गई और लिखित शिकायत भी दी गई।
दूसरे दिन कंपनी के पीआरओ से जानकारी ली गई तो पहले उन्होंने कहा कि ये विस्फोटक गड्ढे बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्होंने ही यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि यह सामग्री उनकी नहीं है। राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण से पूछताछ करने पर उन्होंने साफ कहा कि सड़क निर्माण के लिए कंपनी को विस्फोटकों के उपयोग की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
तहसीलदार को सूचना देने पर उन्होंने बताया कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, क्योंकि विस्फोटक और हथियार पुलिस के अंतर्गत आते हैं। इसके बाद पुलिस अधीक्षक और उपविभागीय अधिकारी को भी जानकारी दी गई। काफी देर बाद अंततः राजुरा पुलिस निरीक्षक सुमित परतेकी, सहायक पुलिस निरीक्षक हेमंत पवार और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
उन्होंने ट्रैक्टर पर लदी विस्फोटकों से भरी सीमेंट की बोरियों को जब्त किया और बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर को थाने में जमा करने के आदेश दिए। कंपनी के पीआरओ से जब विस्फोटकों के बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने फिर कहा कि “यह हमारा नहीं है।” पुलिस ने कंपनी के लाइसेंस की जांच कर दोषी पाए जाने पर मामला दर्ज करने का आश्वासन दिया।
10 जनवरी 2026 तक इस मामले में किसी भी प्रकार का अपराध दर्ज किए जाने की कोई जानकारी सामने नहीं आई। भारत में विस्फोटकों के भंडारण, परिवहन और उपयोग के लिए पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) और मुख्य नियंत्रक विस्फोटक कार्यालय से अनुमति अनिवार्य होती है।
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ब्लास्टर प्रमाणपत्र, जिलाधिकारी की अनुमति, पुलिस और अग्निशमन विभाग की एनओसी तथा अधिकृत भंडारण स्थल जैसी शर्तें कानूनन आवश्यक हैं। इनके बिना हाईवे पर विस्फोटकों का मिलना एक गंभीर अपराध है। इस पृष्ठभूमि में गडचांदूर की एक पुरानी भयावह घटना भी भुलायी नहीं जा सकती।
जब कुछ वर्ष पहले एक व्यक्ति ने गडचांदूर बस स्टैंड के पास भगवती कपड़ा दुकान में बम रखकर वसूली की कोशिश की थी और बाद में वह बम विदर्भ स्कूल के परिसर में निष्क्रिय किया गया था। ऐसे मामलों को देखते हुए चुनाला के इस विस्फोटक प्रकरण को बेहद गंभीरता से लेना आवश्यक है, अन्यथा भविष्य में किसी बड़े और जानलेवा हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यदि ये विस्फोटक कंपनी के नहीं हैं तो वे आए कहां से, कौन उन्हें लाया, किसके लिए और किस उद्देश्य से, ये सभी सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है। अब पूरे राजुरा तहसील की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है।






