
Nashik City Link:नासिक की सिटी लिंक बस सेवा (सोर्सः सोशल मीडिया)
Nashik Municipal Corporation: नासिक महानगरपालिका द्वारा नागरिकों को उत्कृष्ट, सुरक्षित और किफायती बस सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित नासिक महानगरपालिका परिवहन महामंडल लिमिटेड (सिटी लिंक) इन दिनों गंभीर आरोपों के कारण विवादों के घेरे में है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि यह निगम नागरिक हितों की बजाय ठेकेदारों के हितों की रक्षा कर रहा है, जिससे करोड़ों रुपये के वित्तीय भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
आरोप है कि सिटी लिंक की शुरुआत से ही बजट में लगभग 70 करोड़ रुपये के घाटे का प्रावधान किया गया था, लेकिन सेवा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय आर्थिक अनियमितताएं सामने आती जा रही हैं। कामगारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भ्रष्टाचार की बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारी जांच से दूरी बनाए हुए हैं। इससे बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं कि वे निष्पक्ष जांच करेंगे या दोषियों को संरक्षण देते रहेंगे।
शिकायतों के अनुसार, सिटी लिंक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से कई स्तरों पर गंभीर धांधली की जा रही है। इनमें कर्मचारियों की भर्ती के लिए अवैध वसूली, वेतन, पीएफ और बोनस के भुगतान में अनियमितताएं, कर्मचारियों से अवैध जुर्माना वसूलना, टिकट राजस्व का गबन तथा नगर निगम को देय करों का भुगतान न करना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। इस पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप चौधरी को भी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से संदेह और गहरा गया है।
अनुबंधित कर्मचारी सचिन काले ने कहा कि “नासिकवासियों को उच्चस्तरीय बस सेवा देने के नाम पर वरिष्ठ अधिकारी और ठेकेदार मिलकर घोटाला कर रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कोई प्रभावी जांच नहीं हो रही है। अब हम इन मुद्दों को सीधे जनता के दरबार में ले जाएंगे।”
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सामाजिक कार्यकर्ता दर्शन लड्डा ने कहा कि “आम जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली इस सेवा में करोड़ों रुपये के घोटाले हो रहे हैं। कुछ अधिकारियों पर भर्ती के नाम पर पैसों के लेन-देन के मामले दर्ज हैं, फिर भी उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। यदि तत्काल गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़ा जन आंदोलन छेड़ा जाएगा।”






