पुल बना लेकिन ST बस शुरू नहीं, चिमूर-नागभीड़ मार्ग पर छात्रों की परेशानी
Chimur Nagbhid Bus Service: चिमूर-नागभीड़ मार्ग पर पुल बनकर तैयार हो गया लेकिन ST बस सेवा शुरू नहीं हुई। छात्रों और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
पुल बना लेकिन ST बस शुरू नहीं (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Chandrapur News: “लोगों की सेवा में” स्लोगन वाली रापनि की बसें अब यात्रियों को उल्टा परेशान कर रही हैं। चिमूर और नागभीड़ के बीच चलने वाली बस पुलिया के अभाव में बंद की गई थी, लेकिन पुलिया बनकर तैयार होने के बाद भी सेवा शुरू नहीं हुई। इससे छात्रों को भारी शैक्षिक नुकसान हो रहा है और आम नागरिक भी परेशान हैं।
चिमूर डिपो द्वारा गर्मियों में शुरू की गई चिमूर-री-सोनापुर-गोविंदपुर-चिंधीचक-नागभीड़ बस सेवा ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई थी। लेकिन दिवाली से पहले इस बस को बंद कर दिया गया। पुल निर्माण कार्य पूरा होने और यातायात सुचारु होने के बावजूद अभी तक बस शुरू नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
बसें तुरंत शुरू करने की मांग
चिंधीचक ग्राम पंचायत के उपसरपंच प्रदीप समर्थ ने ग्रामीणों के साथ मिलकर मांग की है कि बस सेवा तुरंत शुरू की जाए। इस मार्ग पर वर्तमान में कोई अन्य बस उपलब्ध नहीं है और निजी वाहन चालकों द्वारा अत्यधिक किराया वसूलने की शिकायतें बढ़ रही हैं। चिमूर डिपो की चुप्पी ग्रामीणों के बीच सवाल पैदा कर रही है।
सम्बंधित ख़बरें
‘छोटा मटका’ बाघ केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, अब गोरेवाड़ा की तर्ज पर ताडोबा में बनेगा रेस्क्यू सेंटर
Maharashtra Fake Call Center: कॉल सेंटर घोटाले में अफसरों की मिलीभगत, CBI जांच पर उठे सवाल
क्या SC आरक्षण को टुकड़ों में बांट रही है सरकार? नितिन राउत ने अनंत बदर समिति की रिपोर्ट पर उठाए गंभीर सवाल
मुंबई का शहरी विकास मॉडल बना मिसाल, MMRDA की कार्यप्रणाली अपनाने की तैयारी
ये भी पढ़े: मुफ्त शिक्षा के बावजूद लड़कियों से शुल्क वसूली, RTMNU में मंत्री पाटिल की हाईलेवल मीटिंग
रेत का अवैध उत्खनन- 4 वाहन जब्त, मालिकों पर वन अपराध दर्ज
दुसरी एक खबर में सावली वन विभाग ने बिना अनुमति वन क्षेत्र से रेत का उत्खनन और परिवहन करते पाए गए तीन ट्रैक्टर और एक जेसीबी को ज़ब्त किया। कार्रवाई सिरसी उपवनक्षेत्र अंतर्गत व्याहाड के पास कढोली गांव क्षेत्र में की गई।
जेसीबी मालिक नरसैया मेरफुलवार तथा ट्रैक्टर मालिक सिंधुबाई किसनदेव बोदलकर और राजेश नामदेव सातपुते के खिलाफ भारतीय वन कानून 1927 की धारा 33(1)(E) और 35(1)(C) के तहत अपराध दर्ज किया गया।
वन क्षेत्र सहायक अनंत राखुंडे और वनरक्षक महादेव मुंडे रात की पेट्रोलिंग पर थे, तभी अवैध उत्खनन पकड़ा गया। विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले और सहायक वनसंरक्षक विकास तरसे के मार्गदर्शन में वन परिक्षेत्र अधिकारी विनोद धुर्वे के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की।
