
Shiv Sena UBT Supports BJP in Chandrapur प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन फोटो)
Shiv Sena UBT BJP Alliance: महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका (CMC) में मंगलवार, 10 फरवरी को एक ऐसा राजनैतिक उलटफेर हुआ जिसने महाविकास आघाड़ी (MVA) की नींव हिला दी है। जिस कांग्रेस को पूरा भरोसा था कि वह ठाकरे गुट के साथ मिलकर सत्ता पर काबिज होगी, उसे ऐन मौके पर बड़ा धोखा मिला। उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने अंतिम क्षणों में बीजेपी का हाथ थाम लिया, जिससे न केवल सत्ता का समीकरण बदल गया, बल्कि कांग्रेस के दिग्गज नेता विजय वडेट्टीवार को भी अपने ही गढ़ में करारी मात झेलनी पड़ी।
इस गठबंधन के बाद महापौर पद के चुनाव में बीजेपी की संगीता खांडेकर ने महज 1 वोट के अंतर से जीत हासिल की।
मंगलवार सुबह तक कांग्रेस को उम्मीद थी कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। विजय वडेट्टीवार और ठाकरे गुट के जिलाध्यक्ष संदीप गिर्हे के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, लेकिन यह बैठक सुलह के बजाय तकरार में बदल गई। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद संदीप गिर्हे गुस्से में बैठक छोड़कर बाहर निकल गए। ठाकरे गुट की मुख्य नाराजगी यह थी कि कांग्रेस उन्हें अगले 5 वर्षों में कभी भी महापौर पद देने को तैयार नहीं थी, जबकि बीजेपी ने उन्हें सत्ता में सम्मानजनक हिस्सेदारी का प्रस्ताव दे दिया था।
बीजेपी नेता किशोर जोरगेवार ने इस ऐतिहासिक गठबंधन के फॉर्मूले का खुलासा किया। शहर के विकास के नाम पर दोनों दलों ने निम्नलिखित समझौता किया है:
महापौर पद: सवा-सवा साल के दो-दो कार्यकाल (बीजेपी और ठाकरे गुट के बीच साझा)।
उपमहापौर: पूरे ढाई साल तक यह पद बीजेपी के पास रहेगा (प्रशांत दानव)।
स्थायी समिति: पहले और चौथे साल की अध्यक्षता ठाकरे गुट को दी जाएगी। इसी ‘पावर शेयरिंग’ फॉर्मूले ने ठाकरे गुट के 6 नगरसेवकों को बीजेपी के पाले में खड़ा कर दिया, जिससे बीजेपी का पलड़ा भारी हो गया।
66 सदस्यीय सदन में महापौर पद के लिए हुई वोटिंग में कांटे की टक्कर देखने को मिली। बीजेपी की संगीता खांडेकर को 32 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की वैशाली महाडोळे को 31 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस परिणाम ने कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और महाविकास आघाड़ी की कमजोरी को उजागर कर दिया है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने इसे राज्य की राजनीति के लिए ‘चिंताजनक’ बताया है। इस बदलाव का असर आने वाले जिला परिषद, राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है, जहाँ उद्धव ठाकरे को अब अपने सहयोगियों के साथ नए सिरे से तालमेल बिठाना होगा।






