एट्रोसिटी के वारिसों को दी जाएगी ज़मीन, दादासाहेब गायकवाड़ सशक्तिकरण योजना के तहत प्रस्ताव मंगाए

Dadasaheb Gaikwad Scheme: चंद्रपुर में दादासाहेब गायकवाड़ सशक्तिकरण योजना के तहत एट्रोसिटी मामलों के वारिसों को ज़मीन देने के लिए प्रस्ताव मंगाए गए हैं।
Chandrapur social welfare
Dadasaheb Gaikwad Scheme:चंद्रपुर में दादासाहेब गायकवाड़ (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Atrocity Victims:  अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ जाति के आधार पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 लागू किया है।

अधिनियम में 2016 में किए गए संशोधित नियमों के अनुसार, हत्या या मृत्यु जैसे मामलों में पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के साथ पुनर्वास की सुविधा दी जाती है। अब स्वाभिमान योजना के तहत एट्रोसिटी मामलों में मृतकों के वारिसों को ज़मीन देने का भी प्रावधान किया गया है। इस योजना का लाभ देने के लिए संबंधित लाभार्थियों से प्रस्ताव मंगाए गए हैं।

आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज़

आवेदन के साथ ज़मीन का 7/12 उतारा, गांव का नमूना नंबर 8, संबंधित क्षेत्र की प्राथमिक सहकारी कृषि ऋण सेवा संस्था से कर्ज़ या बकाया न होने का नो-ऑब्जेक्शन प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। इसके अलावा, आवेदक के परिवार के सभी भाई, पत्नियां और बच्चों द्वारा ज़मीन बेचने के लिए सहमति और नो-ऑब्जेक्शन प्रमाणपत्र, जनगणना विभाग की रिपोर्ट (जिसमें बेची जाने वाली कृषि भूमि का सही क्षेत्र दर्शाया गया हो), ज़मीन का नक्शा और समिति द्वारा तैयार प्रस्ताव शामिल करना आवश्यक है। यह प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं होगा। सभी प्रस्ताव कार्यालयीन समय में सहायक आयुक्त, समाज कल्याण, चंद्रपुर के कार्यालय में जमा करने की अपील की गई है।

भूमिहीन परिवारों को मिलेगा स्थायी आय का साधन

अनुसूचित जाति और नव-बौद्ध समुदायों के लिए सशक्तिकरण एवं स्वाभिमान योजना लागू की गई है, जिसमें हाल ही में संशोधन किया गया है। इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अनुसूचित जाति एवं नव-बौद्ध समुदायों के भूमिहीन परिवारों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्हें खेती योग्य चार एकड़ कृषि भूमि या दो एकड़ बागवानी भूमि खरीदकर दी जाएगी।

चूंकि जिले में गैर-आदिवासी परिवारों से कृषि भूमि खरीदी जानी है, इसलिए ज़मीन बेचने के इच्छुक किसानों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। भूमि की कीमत मौजूदा सरकारी दरों के अनुसार तय की जाएगी या फिर ज़िला स्तरीय समिति आपसी बातचीत के बाद अंतिम कीमत निर्धारित करेगी।

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