
अंतिम तत्व पर विचार करना ही सच्चा न्याय है (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Ballarpur Civil Court Bhoomipujan: “संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिए हैं। न्यायिक अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि ये अधिकार अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें।” यह उद्गार बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति अनिल किलोर ने व्यक्त किए। वे बल्लारपुर में नए सिविल न्यायालय (जूनियर स्तर) भवन के भूमिपूजन और शिलान्यास समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
कार्यक्रम में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं चंद्रपुर जिले के संरक्षक न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनिल पानसरे, न्यायमूर्ति महेंद्र नेर्लिकर, चंद्रपुर की मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश समृद्धि भीष्म, बल्लारपुर तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एड. इनायत सैयद, तथा सिविल न्यायाधीश (जूनियर स्तर) सोनिया सावलेश्वरकर शामिल थे।
न्यायमूर्ति किलोर ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के मामलों को केवल आर्थिक कमी के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “गरीबों को न्याय दिलाना हमारा नैतिक और संवैधानिक दायित्व है।”
उन्होंने वकीलों से बार-बार ‘तारीख पर तारीख’ मांगने की प्रवृत्ति समाप्त करने और न्याय व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी तथा सक्षम बनाने में सहयोग करने की अपील की।न्यायमूर्ति किलोर ने आगे कहा कि बल्लारपुर में बनने वाला नया न्यायालय भवन महाराष्ट्र के तहसील न्यायालय भवनों में से एक उत्कृष्ट और आधुनिक भवन होगा। उन्होंने भवन निर्माण में लोक निर्माण विभाग को गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की विशेष जिम्मेदारी बताई।

मुख्य जिला एवं सत्र न्यायाधीश समृद्धि भीष्म ने कहा कि बल्लारपुर, जो सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से समृद्ध रहा है, अब एक आधुनिक और सुसज्जित न्यायालय भवन प्राप्त करने जा रहा है।
प्रस्तावना में एड. इनायत सैयद ने कहा कि यह दिन “न्याय के मंदिर’’ के शिलान्यास के रूप में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन सिविल जज (जूनियर स्तर) नेहा गोरले और रमा कपिल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सिविल जज सोनिया सावलेश्वरकर ने प्रस्तुत किया।
न्यायमूर्ति अनिल पानसरे ने बताया कि 2008 में बल्लारपुर में फौजदारी और सिविल न्यायालय की स्थापना हुई थी, लेकिन न्यायालय किराए के भवन में चल रहा था। नई इमारत का निर्माण 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को समय पर और गुणवत्ता के साथ कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
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न्यायमूर्ति महेंद्र नेर्लिकर ने कहा कि ‘आपके द्वार न्याय’ की अवधारणा के तहत हर तहसील तक न्यायालय भवनों का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नया भवन वकीलों और न्यायाधीशों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा और शीघ्र न्याय प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अभिलेख कक्ष36 करोड़ 73 लाख रुपए की लागत से बनने वाला यह भवन भूतल सहित तीन मंजिला होगा।






