
सिरोंचा में सुविधाओं का अभाव (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Sironcha Development Issues: ब्रिटिश शासन के दौरान जिला मुख्यालय और लंदन तक अपनी खास पहचान रखने वाला सिरोंचा आज बदहाली का शिकार है। कभी मद्रास प्रांत के अपर गोदावरी जिले का मुख्यालय रहने वाला यह शहर तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित है और वैभवशाली इतिहास की गवाही देता है। लेकिन विगत कई दशकों से राजनेताओं की अनदेखी के कारण यहां मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है।
गड़चिरोली जिला मुख्यालय से 220 किमी दूर स्थित सिरोंचा प्राणहिता नदी के तट पर बसा है। 1698 से इसका ऐतिहासिक महत्व रहा है, फिर भी पिछले करीब 500 वर्षों से प्रशासनिक स्तर पर निरंतर उपेक्षा झेल रहा है। सिरोंचा में ग्रामीण अस्पताल तो है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में बड़ी बीमारी की स्थिति में मरीजों को हैदराबाद या वारंगल जाना पड़ता है।
आज भी यहां पर्याप्त क्षमता वाला बस डिपो नहीं है, जिसके चलते नागरिकों को बस सेवा के लिए 100 किमी दूर स्थित डिपो पर निर्भर रहना पड़ता है। नल योजना मौजूद होने के बावजूद फिल्टर प्लांट न होने से लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। बिजली की स्थिति भी दयनीय है। करीब 50 वर्ष पुराने 66 केवी लाइन से 100 किमी दूर आलापल्ली से सप्लाई मिलती है। लाइन पर कोई पेड़ गिर जाए तो 1 से 3 दिन तक बिजली बाधित रहती है।
तहसील के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, शुद्ध पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव और भी अधिक गंभीर है। पांच दशकों से यह स्थिति जस की तस बनी हुई है, जबकि सरकार और प्रशासन लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
सिरोंचा के चारों ओर बारहमासी नदियां बहती हैं, लेकिन बड़े सिंचाई प्रकल्प न होने के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। किसान धान, मिर्च व कपास की खेती करते हैं, लेकिन पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। उपजाऊ भूमि होते हुए भी किसान गरीबी में गुजर-बसर करने को मजबूर हैं।
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सिरोंचा पर्यटन की दृष्टि से समृद्ध है। तीन राज्यों की सीमा और तीन नदियों का संगम-सोमनुर पर्यटन स्थल, कालेश्वर, मुक्तेश्वर मंदिर व अन्य स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव में पर्यटन से मिलने वाले रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।






