Gat Pravartak protest Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara News: महाराष्ट्र राज्य में गट प्रवर्तकों की सेवा शर्तों और वेतन संबंधी मुद्दों पर सरकार द्वारा ठोस निर्णय न लेने के विरोध में 11 फरवरी से राज्यव्यापी असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया गया है। आंदोलन के तहत संभावित कृषि कर्जमाफी से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने और कंप्यूटर आधारित कार्यों का बहिष्कार किया जा रहा है। साथ ही बजट सत्र के दौरान मुंबई में बड़ा मार्च निकालने की चेतावनी दी गई है।
राज्य में लगभग 21 हजार विविध कार्यकारी सेवा सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनके लिए करीब 12 हजार 500 गट प्रवर्तकों की आवश्यकता है। वर्तमान में मात्र 4 हजार 500 गट प्रवर्तक ही संपूर्ण कार्यभार संभाल रहे हैं। कई जिलों में गट प्रवर्तकों को अत्यंत कम वेतन मिल रहा है और वह भी कई महीनों से बकाया है। कुछ स्थानों पर 15 से 40 महीनों तक वेतन न मिलने की स्थिति सामने आई है। संगठन का आरोप है कि 5 फरवरी को पूर्व सूचना देने के बावजूद 10 फरवरी तक सरकार की ओर से कोई बैठक या निर्णय नहीं लिया गया, जिससे गट प्रवर्तकों में रोष व्याप्त है।
संगठन के प्रतिनिधि लेखराम मेंढे ने बताया कि आर्थिक, पारिवारिक और शैक्षणिक कठिनाइयों के कारण गट प्रवर्तक मानसिक दबाव में हैं। सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह असहयोग आंदोलन शुरू किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि बजट सत्र के दौरान मुंबई में व्यापक विरोध प्रदर्शन और मार्च आयोजित किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
सहकारी संस्थाओं से संबंधित कानून की धारा 69 (क) के अनुसार राज्य स्तरीय संवर्ग को पुनः प्रारंभ किया जाए तथा जिला स्तरीय संवर्ग के लिए अनुदान आधारित निगम की स्थापना की जाए। 6 सितंबर 2014 के शासन निर्णय के अनुसार विविध कार्यकारी सेवा सहकारी संस्थाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता बढ़ाकर 4 लाख रुपये की जाए और यह राशि गट प्रवर्तकों के वेतन के लिए निर्धारित की जाए।
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