बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bombay High Court Security Audit: देशभर में जजों और अदालती परिसरों की सुरक्षा को लेकर उठते सवालों के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने महाराष्ट्र पुलिस को निर्देश दिया है कि वे राज्य भर के अदालती भवनों और न्यायाधीशों के आवासीय परिसरों की सुरक्षा स्थिति का विस्तृत विवरण पेश करें।
यह मामला 2021 में झारखंड के धनबाद में एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के बाद चर्चा में आया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय देश भर में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसी कड़ी में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए जजों का निडर होना आवश्यक है, जो केवल एक सुरक्षित वातावरण में ही संभव है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से उन सभी सुरक्षा ऑडिट की प्रतियां मांगी हैं, जो हाल के दिनों में की गई हैं। इस ऑडिट रिपोर्ट में मुंबई उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ, गोवा, औरंगाबाद और नागपुर स्थित खंडपीठ, कोल्हापुर की सर्किट बेंच, सभी जिलों की अधीनस्थ (Subordinate) अदालतें, न्यायाधीशों के आधिकारिक निवास स्थानों को कवर करने का निर्देश दिया गया है।
महाराष्ट्र के महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने 10 फरवरी को अदालत को आश्वस्त किया कि वह पुलिस विभाग द्वारा जजों और कोर्ट की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी साझा करेंगे। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को तय की है।
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सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि जजों और वकीलों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। राज्यों का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वे कोर्ट रूम के भीतर और बाहर ऐसी व्यवस्था करें कि न्याय वितरण प्रणाली में लगे लोग बिना किसी दबाव या डर के अपना काम कर सकें।