Bhandara News: धान खरीदी लक्ष्य में देरी से किसानों की बढ़ी परेशानी, दो महीनों से मंजूरी का इंतजार

Lakhandur Farmers Issue: लाखांदुर में धान खरीदी लक्ष्य मंजूरी में दो महीने की देरी से हजारों किसान परेशान हैं, लाखों क्विंटल धान गोदामों में अटका हुआ है।
Lakhandur farmers issue
MSP paddy procurement (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Farmer: सरकार और प्रशासन की उदासीन नीति के कारण पिछले दो महीनों से खरीफ धान खरीदी का लक्ष्य मंजूर नहीं किया गया है। इसे लेकर किसानों के उत्पीड़न के आरोप लगाए जा रहे हैं और लक्ष्य मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना के तहत पिछले खरीफ सीजन में तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 53 धान खरीदी केंद्र मंजूर किए गए थे, जिनमें से 52 केंद्रों पर प्रत्यक्ष रूप से धान खरीदी हुई। खरीफ के दौरान तहसील में कुल 26,293 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई थी। प्रति हेक्टेयर 40 क्विंटल खरीदी के निर्देशों के अनुसार तहसील में लगभग 10.51 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

लाखों क्विंटल धान गोदामों में पड़ा हुआ है

इस लक्ष्य के मुकाबले पिछले कुछ महीनों में किसानों से कुल 6.42 लाख क्विंटल धान की खरीदी हो सकी है, जबकि शेष लगभग 5 लाख क्विंटल धान लक्ष्य के अभाव में अटका हुआ है। अटकी हुई खरीदी को लेकर जिला विपणन विभाग ने दो महीने पहले ही सरकार से लक्ष्य मंजूरी की मांग की थी, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इसके कारण तहसील के हजारों किसानों का लाखों क्विंटल धान गोदामों में पड़ा हुआ है।

आंदोलन भी किए

किसानों ने विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से फसल ऋण लेकर खरीफ फसलों, विशेषकर धान की बुआई की थी। आमतौर पर फसल उत्पादन के बाद इसी आय से ऋण चुकाया जाता है, लेकिन खरीदी में देरी से किसानों में चिंता का माहौल है। खरीफ धान उत्पादन को चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी कई किसानों की उपज लक्ष्य के अभाव में नहीं खरीदी गई है। इसे लेकर पिछले कुछ महीनों में विभिन्न किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने लक्ष्य मंजूरी की मांग को लेकर आंदोलन भी किए हैं।

ग्रीष्मकालीन केंद्रों पर करनी पड़ सकती है खरीदी

सरकार द्वारा पिछले दो महीनों से मूल धान खरीदी केंद्रों को लक्ष्य मंजूर नहीं किया गया है, जिसके कारण हजारों किसानों की उपज अटकी हुई है। यदि जल्द लक्ष्य मंजूर नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना से वंचित रह सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को लाभ लेने के लिए आगामी ग्रीष्मकालीन धान खरीदी केंद्रों का सहारा लेना पड़ सकता है।

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