
Black Spots Reduce:भंडारा जिले में प्रशासनिक सतर्कता (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara Road Safety: भंडारा जिले में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रशासनिक प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अब जिले में केवल 6 ब्लैक स्पॉट (अत्यधिक दुर्घटना संभावित क्षेत्र) शेष रह गए हैं। इससे पहले इनकी संख्या 8 थी, लेकिन सुरक्षा उपायों और बुनियादी ढांचे में सुधार के चलते दो प्रमुख खतरनाक मोड़ों को ब्लैक स्पॉट की सूची से हटा दिया गया है।
यह उपलब्धि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं की गंभीरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, शहर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 53 का यातायात नए बाईपास और फ्लाईओवर पर स्थानांतरित किए जाने के कारण कारधा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कारधा नाका और भिलेवाड़ा को ब्लैक स्पॉट की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।
वर्तमान में जो 6 ब्लैक स्पॉट शेष हैं, उनमें मुख्य रूप से साकोली और जवाहरनगर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र शामिल हैं। साकोली क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग 353-सी पर स्थित शिवनीबांध रोड और फिश सेंटर क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है। यहां पिछले तीन वर्षों में 10 दुर्घटनाओं में 5 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी मार्ग पर कुंभली गांव से जिला परिषद स्कूल तक का हिस्सा भी दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात है।
सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 के दौरान जिले में कुल 229 जानलेवा सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 266 लोगों की मौत हुई और 631 लोग घायल हुए। पुलिस प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग के लिए शेष 6 ब्लैक स्पॉट पर दुर्घटनाओं को रोकना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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जवाहरनगर क्षेत्र में कवडसी फाटा और खरबी नाका अब भी सड़क सुरक्षा समिति की निगरानी में हैं, जहां तेज रफ्तार और सड़क के तीखे घुमाव दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण बने हुए हैं। इसी तरह लाखनी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले मानेगांव सड़क क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में 8 सड़क हादसों में 5 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसके अलावा तुमसर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत राज्य राजमार्ग 271 पर मेहगांव बस स्टॉप के पास का मोड़ भी दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी सुधारों के साथ-साथ वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों का सख्ती से पालन करना भी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अनिवार्य है।






