गुलाबी ठंड में चढ़ा राजनीतिक पारा, भंडारा में होगा चौकोणी मुकाबला, पार्टियां बना रही रणनीतियां

Bhandara News: भंडारा नगर परिषद चुनाव में चारों प्रमुख दलों के बीच कांटे की टक्कर बन गई है। गुप्त बैठकों, रिश्तों की राजनीति, घर-घर संपर्क और पुराने कार्यकर्ताओं की सक्रियता से चुनावी तापमान बढ़ गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Bhandara Politics: भंडारा नगर परिषद चुनाव नजदीक आते ही भंडारा में राजनीतिक तापमान अचानक तेज हो गया है। मौसम भले ही गुलाबी ठंड का हो, लेकिन चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट)के बीच इस बार चौकोणी मुकाबला बन चुका है।

चारों दलों ने देर रात तक गुप्त बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है, जिनमें उम्मीदवारों, प्रभागनिहाय समीकरणों और वोट जुटाने की सूक्ष्म रणनीति पर चर्चा चल रही है। भंडारा नगर परिषद में 17 प्रभागों से 35 सदस्य चुने जाएंगे।

इसके अलावा नागरिकों को नगराध्यक्ष पद के लिए एक अतिरिक्त मतदान भी करना होगा। इस प्रकार कुल 36 सीटों पर इस बार चुनावी संघर्ष होगा और बहुत-से प्रभागों में मुकाबला बेहद कांटे का हो चुका है।

प्रचार ने पकड़ी रफ्तार

किसी भी राजनीतिक दल के लिए लड़ाई अब सरल नहीं रह गई है। उम्मीदवार और कार्यकर्ता अब पूरी तरह से आक्रमक मोड में आ गए हैं। प्रचार ने रफ्तार पकड़ी है। हर पार्टी के नेता अपने उम्मीदवारों को मतदाता सूचियां सौंप रहे हैं, और अब शुरू हुआ रिश्तों और परिचयों का बड़ा मिशन चल रहा है।

किस घर में कौन परिचित है। किस परिवार से पुराने संबंध रहे हैं। कौन-सा संपर्क पिछले चुनाव में सक्रिय था। कहां रिश्ते ठंडे पड़े हैं और कहां उन्हें फिर से जोड़ा जा सकता है। हर उम्मीदवार बारीकी से यह सब खंगाल रहा है। थोड़ी-सी पहचान भी हो तो उसे मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

कई वर्ष पुरानी, निष्क्रिय पड़ी पहचानें फिर से जिंदा की जा रही हैं। कभी अचानक घर-घर जाकर मुलाकात, तो कभी देर रात तक फोन कॉल्स कर रहें हैं। मतदाताओं के मन में अपनत्व निर्माण करने का प्रयास किया जा रहा है।

राजनीतिक समीकरण बदलने की हलचल

  • पिछले कई वर्षों से निष्क्रिय पड़े कार्यकर्ता और पुराने समर्थक अचानक फिर से सक्रिय हो रहे हैं। सभी प्रमुख पार्टियां अपने-अपने गुटों में चल रही नाराजगी को शांत करने, अंदरूनी मतभेद मिटाने और टूटे हुए संबंधों को जोड़ने के लिए ताबड़तोड़ बैठकों में जुटी हैं।
  • पुराने रिश्तों को फिर से मजबूत किया जा रहा है, क्योंकि हर दल अच्छी तरह समझता है कि यही पुराने चेहरे और यही रिश्ते इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।
  • भंडारा नगर परिषद चुनाव में इस समय सबसे अधिक जोर निजी संपर्कों, रिश्तों के पुनर्निर्माण, घर-घर पहुंच और भावनात्मक जुड़ाव पर है। राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।
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