आरक्षण बचाव के लिए हजारों लोगों की उत्स्फूर्त भागीदारी, आदिवासी के मोर्चे से गूंज उठा शहर

Tribal Protest: संविधानिक अधिकारों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण की रक्षा के लिए सोमवार 6 अक्टूबर को भंडारा शहर में संयुक्त आदिवासी कृति समिति की ओर से आक्रोश मोर्चा निकाला गया।
आरक्षण बचाव के लिए हजारों लोगों की उत्स्फूर्त भागीदारी
आरक्षण बचाव के लिए हजारों लोगों की उत्स्फूर्त भागीदारी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Bhandara News: संविधानिक अधिकारों और अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण की रक्षा के लिए सोमवार 6 अक्टूबर को भंडारा शहर में संयुक्त आदिवासी कृति समिति की ओर से आक्रोश मोर्चा निकाला गया। जिले के विभिन्न तहसीलों से पारंपरिक वेशभूषा में आए हजारों आदिवासी बांधवों की जोशीली घोषणाओं से पूरा शहर गूंज उठा।

दसरा मैदान से मोर्चे की शुरुआत हुई। बोगस हटाओ, आदिवासी बचाओ और आरक्षण बचाओ, संविधान बचाओ जैसी गगनभेदी घोषणाओं के साथ मोर्चा शहर में निकाला गया। गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों से भारी संख्या में आदिवासी महिला और पुरुष इस मोर्चे में शामिल हुए। इस अवसर पर बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती और बाबूराव शेडमाके के रूप में सजे युवाओं ने आदिवासी समाज की शौर्य परंपरा का जीवंत प्रदर्शन किया।

मोर्चा शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न

संयुक्त आदिवासी कृती समिति के कार्याध्यक्ष विनोद वट्टी ने कहा कि, यदि समाज के अधिकार छीनने का कोई प्रयास किया गया, तो आदिवासी समाज सड़कों पर उतरकर तीव्र आंदोलन करेगा। मोर्चा दसरा मैदान से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। जिले की विभिन्न आदिवासी संस्थाओं, छात्रों, महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। पूरा मोर्चा शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।

समाजबंधु बड़ी संख्या में उपस्थित

इस अवसर पर गोवर्धन कुंभरे (अध्यक्ष), विनोद वट्टी (कार्याध्यक्ष), अजाबराव चिंचामे, अशोक उइके, सोपचंद सिरसाम, धर्मराज भलावी, प्रमोद वरखडे, ज्ञानेश्वर मडावी, जगनजी उइके, हरिभाऊ येलणे, प्रभात पेंदाम, कृष्णा टेकाम, शिवम मडावी, नंदलाल कुलमेथे, नागोराव मरकाम सहित समाजबंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

सरकार के समक्ष रखी ये मांगें

बंजारा तथा अन्य किसी भी जाति को अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग में शामिल न किया जाए, अनुसूचित जनजातियों की सूची में बिंदु क्रमांक 2 पूर्ववत रखा जाए, राज्य में अनुसूचित जनजातियों के रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाए, छात्रावासों की डीबीटी योजना बंद कर पूर्व की तरह शासकीय भोजनालय फिर से शुरू की जाए, जाति वैधता प्रमाणपत्र के बिना किसी को भी शासकीय या राजनीतिक लाभ न दिया जाए, भंडारा जिले में पेसा कानून तत्काल लागू किया जाए, सर्वोच्च न्यायालय के 6 जुलाई 2017 के निर्णयानुसार अधिसंख्य घोषित 12,500 पदों पर केवल वास्तविक आदिवासी उम्मीदवारों की भर्ती की जाए, आदिवासी महापुरुषों के इतिहास को शालेय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

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