भंडारा में किसानों को मिला बड़ा सहारा, पशुधन योजना के लिए 5.48 करोड़ का फंड मंजूर

Bhandara News: भंडारा जिले में राष्ट्रीय पशुधन योजना के तहत 10 लाभार्थियों को 5.48 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया गया है। इससे बकरी पालन सहित कृषि-आधारित व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Bhandara News In Hindi: राष्ट्रीय पशुधन योजना के तहत भंडारा जिले के किसान, बचत समूह, एफपीओ तथा अन्य स्थानीय संस्थाओं को पशुधन संवर्धन और कृषि-आधारित व्यवसाय के लिए बड़ा सहारा मिला है। जिले में 10 लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत 5,48,59,006 रुपये का अनुदान मंजूर किया गया है, जिनमें से कुछ लाभार्थियों को शासन और बैंक के माध्यम से निधि का वितरण भी शुरू हो चुका है।

भंडारा जिले की इन परियोजनाओं में प्रमुख रूप से बकरी पालन योजनाएं शामिल हैं। मोहाडी, तुमसर, लाखनी और भंडारा तहसीलों के लाभार्थियों को विभिन्न परियोजनाएं मंजूर हुई हैं तथा शासन और बैंकों के माध्यम से निधि वितरण की प्रक्रिया जारी है।

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

इन परियोजनाओं से किसानों और स्थानीय जनता को आर्थिक सहायता, पशुधन संवर्धन और उत्पादन वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त होंगे। प्रत्येक परियोजना के लिए शासन और बैंक की ओर से निधि वितरण, निर्माण कार्य, मशीनरी की उपलब्धता और क्रियान्वयन की योजना सावधानीपूर्वक बनाई जा रही है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय पशुधन योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाएं सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम कदम साबित हो रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र के किसान, बचत समूह तथा एफपीओ संस्थाओं को उत्पादन वृद्धि हेतु आवश्यक तकनीकी और आर्थिक सहायता मिल रही है। परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए शासन द्वारा निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।

निधि वितरण में समस्याएं

निधि वितरण में कुछ अड़चनें सामने आई हैं। मार्च 2024 में स्वीकृत परियोजनाओं की निधि अप्रैल तक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अगस्त अंत तक भी कुछ परियोजनाओं का वितरण नहीं हो पाया। कुछ परियोजनाओं की निधि मार्च 2025 से लंबित है, जिससे कार्य ठप पड़ गया है। इसके कारण किसानों को कर्ज चुकाने, पशुओं की खरीद और देखभाल, मज़दूरों के वेतन के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कुछ किसानों ने अपनी हिस्सेदारी जमा करने के बावजूद पहली किश्त नहीं पाई है।

बैंकों की अड़चन

राष्ट्रीयकृत बैंकों से कर्ज प्राप्त करने में कठिनाइयां आने पर जिला बैंकों ने रिज़र्व बैंक की अनुमति लेकर ऋण वितरण शुरू किया। इससे जिले में बड़ी संख्या में परियोजनाएं खड़ी हो पाईं, लेकिन केंद्र सरकार से निधि न आने के कारण कई परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।

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