भंडारा में धान फसल संकट: आंबाडी-टेकेपार लिफ्ट सिंचाई योजना से पानी छोड़ने की मांग

Ambadi Tekepaar Lift Irrigation Scheme: भंडारा में बारिश की कमी से धान की फसल संकट में है। आंबाडी-टेकेपार लिफ्ट सिंचाई योजना के लाभक्षेत्र के किसानों ने फसल बचाने के लिए तत्काल पानी छोड़ने की मांग की।
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किसानों का प्रदर्शन (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Paddy Crop Crisis: भंडारा जिले में बारिश की कमी के कारण धान की खेती संकट में आ गई है। आंबाडी एवं टेकेपार लिफ्ट सिंचाई योजना के लाभक्षेत्र में धान की रोपाई पौध सूखने की स्थिति में पहुंच गई है। फसल को बचाने के लिए सिंचाई योजना से तत्काल पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे की ओर से पूर्व जिलाप्रमुख नरेश डाहारे के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों के हित में जनआंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन में बताया गया है कि भंडारा जिला धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है और गोसीखुर्द परियोजना के अंतर्गत आने वाली आंबाडी तथा टेकेपार लिफ्ट सिंचाई योजनाओं पर सैकड़ों किसान निर्भर हैं। इस वर्ष बारिश में देरी और अनियमितता के कारण किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों ने कर्ज लेकर और भारी खर्च के साथ धान की पौध तैयार की है, लेकिन समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने से फसल के सूखने का खतरा पैदा हो गया है।

फसल नष्ट होने के आसा

रशिवसेना प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यदि अगले कुछ दिनों में सिंचाई योजना का पानी लाभक्षेत्र के खेतों तक नहीं पहुंचा, तो खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो सकती है। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होगा और उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। पूर्व जिलाप्रमुख एवं जिला परिषद के पूर्व सभापति नरेश डाहारे ने कहा कि किसानों के हित मं प्रशासन को युद्धस्तर पर कदम उठाकर सिंचाई योजना से तत्काल पानी छोड़ना चाहिए।

भंडारा प्रशासन से सिंचाई पानी उपलब्ध कराने की गुहार

यदि मांग की अनदेखी की गई तो शिवसेना किसानों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करेगी। ज्ञापन पर देवेंद्र कारेमोरे, नथ्थू बांते, ताराचंद भुरे, गजानन कलंबे, दिलीप वाडीभस्मे, गोपाल हटवार, सूरज देशमुख सहित अनेक किसानों के हस्ताक्षर हैं। अब किसानों की नजर प्रशासन के निर्णय पर टिकी है। यदि समय रहते सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया गया तो धान की फसल को जीवनदान मिलेगा, अन्यथा जिले के अनेक किसान परिवारों के सामने आर्थिक संकट और आजीविका का गंभीर प्रश्न खड़ा हो सकता है।

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