39 साल का सफर: संभाजीनगर मनपा का प्रशासनिक व नागरिक विकास इतिहास; मनपा का ऐतिहासिक सफर

Urban Development: छत्रपति संभाजीनगर मनपा का 39 वर्षों का इतिहास नगर परिषद से महानगरपालिका बनने तक शहर के प्रशासनिक विस्तार और नागरिक सुविधाओं के विकास की यात्रा को दर्शाता है।
Journey of 39 years: Administrative and civic development history of Sambhajinagar Municipal Corporation; Municipal Corporation's historical journey
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Municipal Corporation: छत्रपति संभाजीनगर मनपा का 39 वर्षों का इतिहास शहर के प्रशासनिक व नागरिक विकास की यात्रा को दर्शाता है। वर्ष 1936 में क्षेत्रफल 54।5 वर्ग किमी में नगर परिषद की स्थापना स्वशासन की दिशा में अहम कदम था। शहर के विस्तार व बढ़ती आबादी को देखते हुए 18 गांवों को शुमार कर 8 दिसंबर 1982 में इसे मनपा का दर्जा दिया गया। नतीजतन, कुल क्षेत्रफल बढ़कर 138.5 वर्ग किमी हो गया।

इसके साथ ही प्रशासनिक जिम्मेदारियों व नागरिक सुविधाओं का दायरा भी व्यापक हुआ। फरवरी 2023 में केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद औरंगाबाद मनपा नाम (AMC) बदलकर आधिकारिक रूप से छत्रपति संभाजीनगर मनपा अर्थात CSMC रखा गया। पेयजल आपूर्ति, सड़कें, सीवरेज, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा व अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शहर के 29 प्रभागों को 10 जोन में बांटा गया है।

टाउन हॉल जिसे कॉर्पोरेशन हॉल के नाम से भी जाना जाता है, शहर की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। औपनिवेशिक काल में यह प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रहा च 1947 में स्वतंत्रता के बाद मनपा की संपत्ति बना, आसफजाही काल में बना व बाद में ब्रिटिश के अधीन रहा यह हॉल प्रशासन व सार्वजनिक बैठकों का एक मुख्य केंद्र था।

आज भी इसका उपयोग सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। शुरुआती पांच वर्षों तक इसका कामकाज प्रशासकों के जरिए संचालित किया गया। 17 अप्रैल 1988 को 60 सीटों के लिए पहली बार मनपा चुनाव कराए गए, मनपा का पहला चुनाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं था।

राजनीतिक व सामाजिक माहौल में बदलाव

1988 का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा। बल्कि यह सांप्रदायिक तनाव व राजनीतिक उठापटक के लिए भी जाना गया, इसके बाद कर्ड महापौर बदले, जबकि कुछ वर्षों में निर्वाचित निकाय ही कार्यरत रहा। शिवसेना ने अपने चुनाव अभियान में हिंदुत्ववादी भावनाओं को प्रमुखता से उभारने से शहर के राजनीतिक व सामाजिक माहौल में बदलाव देखने मिला, यही दौर शहर की राजनीति को एक नई पहचान देने वाला साबित हुआ, मनपा का यह सफर प्रशासनिक प्रयोगों, गठबंधनों व सत्ता परिवर्तन का साक्षी रहा है व उसने शहर की राजनीति को विशिष्ट पहचान दी है।

सत्ता, रणनीति व राजनीतिक ध्रुवीकरण की हुई शुरुआत

बल्कि यह राजनीतिक प्रयोगों, गठबंधनों, वैचारिक संघर्ष व सत्ता परिवर्तन की शुरुआत थी। मनपा के राजनीतिक इतिहास में 17 अप्रैल 1988 ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज है क्योंकि इसी दिन शहर में पहली बार 60 सीटों के लिए चुनाव कराए गए।

चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक रूप से रोचक स्थिति बनी, पार्टी स्थापना के मात्र तीसरे वर्ष में चुनावी मैदान में उत्तरी शिवसेना ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाते हुए 28 सीटों पर जीत दर्ज की व सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। यह सफलता मुंबई व ठाणे के बाद शिवसेना के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी गई।

उक्त चुनाव में कांग्रेस को 18, मुस्लिम लीग को 10 सीटें प्राप्त हुईं, शेष सीटें अन्य दलों व निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से में गई। भाजपा का खाता भी खुल नहीं सका। हालांकि, सबसे अधिक सीटें मिलने के बावजूद शिवसेना अपना महापौर नहीं बना सकी व कांग्रेस मुस्लिम लीग गठबंधन की सत्ता स्थापित हुई।

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