BDNPH-2018-05 को राष्ट्रीय मान्यता, मराठवाड़ा कृषि अनुसंधान को गौरव; किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि

BDNPH 2018-05 Variety: बदनापुर कृषि अनुसंधान केंद्र की विकसित संकरित अरहर किस्म बीडीएनपीएच-2018-05 को केंद्र सरकार ने अधिसूचित किया है। यह महाराष्ट्र समेत चार राज्यों के लिए उपयुक्त है।
BDNPH-2018-05 receives national recognition, bringing glory to Marathwada Agricultural Research; a major achievement for farmers.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Marathwada Agricultural University: छत्रपति संभाजीनगर वसंतराव नाईक मराठवाडा कृषि विश्वविद्यालय के बदनापुर स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र की ओर से विकसित अरहर की संकरित किस्म बीडीएनपीएच-2018-05 को भारत सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से मान्यता प्रदान की है।

यह राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों की ओर से अनुशंसित पहली संकरित किस्म है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अधिसूचना क्रमांक S.O. 6123 (E) के तहत इसे अधिसूचित किस्म घोषित किया है। यह महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के लिए अनुशंसित है तथा सूखा व सिंचित दोनों परिस्थितियों में उपयुक्त पाई गई है।

किस्म की ये हैं विशेषताएं

उत्पादकता: 1759 से 2159 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, परिपक्वता

अवधि: 155 से 160 दिन,

दाने का रंगः सफेद, प्रमुख रोग (मर व वांझ) के प्रति मध्यम प्रतिरोधक व कीटों से कम प्रभावित।

ड्रिप सिंचाई में 18 क्विंटल तक उत्पाद होगा प्राप्त

यह इस मौके पर कुलपति प्रो (डॉ) इन्द्र मणि ने कहा कि केंद्र सरकार की दलहन उत्पादन मिशन के लिए हाल ही में अधिसूचित संकरित अरहर किस्म किसानों की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बदलती जलवायु व सूखा परिस्थितियों में भी यह उपयोगी साबित होगी। उन्होंने बताया कि विवि की ओर से विकसित गोदावरी' अरहर किस्म से किसानों ने सूखा क्षेत्र में 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ तथा ड्रिप सिंचाई में 18 क्विंटल तक उत्पाद प्राप्त किया है। इससे लगभग एक लाख रुपए प्रति एकड तक आय मिलने की प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई है। इसी तरह बीडीएनपीएच-2018-05 भी उतनी ही लाभकारी होगी।

अनुसंधान निदेशक डॉ खिजर बेग ने कहा कि इस नई किस्म के प्रसार से अरहर उत्पाद व स्थिरता में वृद्धि होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी व उनका जीवन स्तर ऊंचा उठेगा, इस किस्म के विकास में शामिल वैज्ञानिकों का इन्द्र मणि व बेंग ने अभिनंदन किया, किस्म के विकास में शिक्षा निदेशक भगवान आसेवार, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ राकेश आहिरे, पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ दत्तप्रसाद वासकर तथा विभाग प्रमुख डॉ हिराकात कालपांडे के मार्गदर्शन में मुख्य वैज्ञानिक व प्रभारी अधिकारी डॉ दीपक पाटिल व डॉ विष्णु गीते ने प्रमुख भूमिका निभाई, उन्हें डॉ किरण जाधव, डॉ प्रशांत सोनटक्के, डॉ पीए पगार व डॉ ज्ञानेश्वर मुटकुले ने सहयोग दिया।

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