
Women Focused Campaign Materia:अमरावती में मनपा (सोर्सः सोशल मीडिया)
Amravati Municipal Election: चुनाव आयोग की ओर से उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह मिलने के बाद महानगरपालिका चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। बदलते दौर में जहां डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं इस बार पारंपरिक प्रचार सामग्री की मांग भी बड़े पैमाने पर देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि मनपा चुनाव मकर संक्रांति के दौरान हो रहे हैं, जिससे प्रचार सामग्री पर त्योहारी रंग साफ दिखाई दे रहा है।
मकर संक्रांति के अवसर पर महिलाओं द्वारा वितरित किए जाने वाले ‘वाण’ में भी चुनाव प्रचार की झलक नजर आ रही है। इस बार प्रचार रणनीति में महिलाओं को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है और ‘लाड़ली बहनों’ को आकर्षित करने वाली प्रचार सामग्री तैयार की गई है।
ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। पारंपरिक रुमाल, दुपट्टे और टोपियों के साथ-साथ अब हुडी, साड़ियां, टिकली, मंगलसूत्र, हल्दी-कुमकुम की टोकरियां जैसी प्रचार सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। कुल मिलाकर इस बार का महानगरपालिका चुनाव प्रचार महिला-केंद्रित और त्योहारों की पृष्ठभूमि में विशेष नजर आ रहा है।
चुनाव में भले ही 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू हो, लेकिन प्रचार सामग्री पर महिलाओं का प्रभाव लगभग 100 प्रतिशत दिखाई दे रहा है। प्रचार सामग्री की खरीद के दौरान उम्मीदवार भी महिलाओं को आकर्षित करने वाले साहित्य को प्राथमिकता दे रहे हैं।
करीब 7 से 8 वर्षों के अंतराल के बाद मनपा चुनाव हो रहे हैं, जिससे इच्छुक उम्मीदवारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसमें महिला उम्मीदवारों की भागीदारी भी खास रही है। विधानसभा चुनाव में ‘लाड़ली बहनों’ द्वारा महायुति सरकार को मिले निर्णायक समर्थन के बाद अब ‘मिनी विधानसभा’ कहे जाने वाले मनपा चुनाव में भी महिला मतदाताओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
डिजिटल युग में सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से प्रचार तेज हुआ है, लेकिन सभी मतदाताओं तक डिजिटल पहुंच संभव न होने के कारण डोर-टू-डोर प्रचार का महत्व बना हुआ है। इस दौरान उम्मीदवार अपने नाम वाले कैलेंडर, बैज, पंपलेट और अन्य प्रचार सामग्री वितरित कर रहे हैं। यही कारण है कि डिजिटल प्रचार के बावजूद पारंपरिक प्रचार सामग्री की मांग में कमी नहीं आई है। उल्टे, इस बार इसमें 40 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।
कड़ाके की ठंड के कारण चुनाव प्रचार करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। ऐसे में नेताओं की तस्वीरों वाली हुडी और साड़ियां प्रचार का मुख्य आकर्षण बन रही हैं। ठंड से बचाव के लिए कार्यकर्ताओं को विशेष हुडी उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार महिला कार्यकर्ताओं के लिए भी विभिन्न दलों के चुनाव चिन्हों वाली साड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिनकी भारी मांग देखी जा रही है। सामग्री महंगी होने के बावजूद मांग में कमी नहीं आई है।
प्रचार सामग्री के व्यवसाय को मिली संजीवनी
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कई वर्षों बाद महानगरपालिका चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से प्रचार सामग्री के व्यवसाय को नई गति मिली है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से इस व्यवसाय को आंशिक राहत मिली थी, लेकिन इस बार प्रचार सामग्री की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसके बावजूद उम्मीदवारों का उत्साह कम नहीं हुआ है। विक्रेताओं के अनुसार आने वाले दिनों में प्रचार सामग्री की मांग और बढ़ने की संभावना है।






