उत्पादन की लागत भी नहीं निकलने से किसान परेशान (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Amravati Farmer Proble: केले के दाम गिरने से किसान चिंतित हैं। कई किसानों ने घड़ों सहित खड़ी केले की फसलों पर जेसीबी और रोटावेटर चलाना शुरू कर दिया है। किसी ने घड़ काटकर पशुओं को खिलाया, तो कुछ किसानों की बागों में घड़ सड़ रही है। कटाई और परिवहन का खर्च निकालने में असमर्थ होने के कारण किसान चिंतित दिखाई दे रहे हैं। मांग कम होने का हवाला देकर व्यापारी कटाई के लिए तैयार नहीं हैं।
नतीजतन, केले उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं। एक ओर व्यापारी किसानों से केले औने-पौने दाम पर खरीद रहे हैं, जबकि पके केले, जो दर्जन के हिसाब से बिकते हैं, उनके दाम कम नहीं हुए हैं। जिले के अधिकांश शहरों में अच्छी गुणवत्ता वाले पके केले आज भी 30 से 40 रुपये प्रति दर्जन बिक रहे हैं। कुछ विक्रेताओं ने बिचौलियों को हटाकर सीधे किसानों से घड़ खरीदना शुरू किया है, लेकिन व्यापारी अब भी बहुत कम, यानी गिरे हुए दामों पर ही केले की मांग कर रहे हैं। इस कारण उत्पादन लागत भी पूरी तरह से नहीं निकल रही है।
इसलिए कई किसानों ने खड़े केले उखाड़कर वैकल्पिक फसलों की योजना शुरू कर दी है। अचलपुर तहसील के जवर्डी गांव के मुरलीधर जयसिंगपुरे ने डेढ़ हजार केले के पेड़ों की बाग पर बुलडोजर चलवाकर उन्हें उखाड़वाया और कचरे के ढेर पर फेंक दिया। उनके पास खेलबारी इलाके में साढ़े तीन एकड़ जमीन है।
जिले के अचलपुर और अंजनगांव सुर्जी तहसील में बड़े पैमाने पर केले की खेती की जाती है। पिछले कुछ महीनों से बाजार में भारी मंदी छाई हुई है। दीपावली के समय भी मुश्किल से ठीक-ठाक दाम मिल रहे थे, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ती गई। उस समय 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव मिल रहे थे, लेकिन उसके बाद दाम लगातार गिरते रहे। दाम हजार रुपये से भी नीचे पहुंच गए और अब तक कोई सुधार नहीं हुआ है। इस स्थिति में किसान मेहनत से तैयार की गई केले की बागों पर जेसीबी चलाने को मजबूर हो रहे हैं।
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किसानों का उत्पादन खर्च उनकी आय से तीन गुना अधिक बैठ रहा है। मुरलीधर जयसिंगपुरे ने लगभग साढ़े पांच हजार पौधे लगाए थे, जिस पर करीब 9 लाख रुपये का खर्च आया। इसके लिए उन्होंने स्टेट बैंक से 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। 1200-1500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे दाम अचानक गिरकर 400 रुपये पर आ गए, जिससे पूरी फसल बेचने पर उन्हें सिर्फ 3 लाख रुपये ही मिले। अंततः जब केले मुफ्त में तोड़कर ले जाने को भी कोई तैयार नहीं हुआ, तो मजबूर होकर उन्होंने पूरी बाग पर जेसीबी चलवाकर फसल को उखाड़कर फेंक दिया।