Vasai Virar mayor election (सोर्सः सोशल मीडिया)
Vasai Virar Mayor Election: पिछले माह हुए महानगरपालिका चुनावों में मुंबई सहित एमएमआर के अधिकांश शहरों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने जीत दर्ज की, लेकिन वसई-विरार महानगरपालिका में पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) को हराने में बीजेपी असफल रही।
अब 3 फरवरी को होने वाले महापौर चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चा है कि स्पष्ट बहुमत के बावजूद बीजेपी ने वसई-विरार मनपा में अपना पहला महापौर बनाने के लिए ‘ऑपरेशन लोटस’ की रणनीति तैयार की है।
वसई-विरार मनपा चुनाव में बहुजन विकास आघाड़ी ने 71 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा है, जबकि बीजेपी 43 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। पहली बार बीजेपी ने यहां इतनी बड़ी संख्या में सीटें जीतते हुए महापौर और उपमहापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किए हैं। स्थानीय बीजेपी विधायक राजन नाइक ने ऑपरेशन लोटस के संकेत देते हुए कहा है कि महापौर चुनाव के दिन उनकी रणनीति सबके सामने आ जाएगी।
दूसरी ओर, बहुजन विकास आघाड़ी ने अंतिम समय तक अपने नगरसेवकों को एकजुट और सुरक्षित रखने की रणनीति बनाई है। साथ ही, मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए कई उम्मीदवार उतारकर बीजेपी की रणनीति को विफल करने की कोशिश की जा रही है।
बविआ की ओर से महापौर पद के लिए अजीव यशवंत पाटील, प्रफुल्ल साने और निषाद चोरघे को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि उपमहापौर पद के लिए मार्शल लोपिस और कन्हैया भोईर मैदान में हैं। वहीं, बीजेपी ने महापौर पद के लिए दर्शना त्रिपाठी और उपमहापौर पद के लिए नारायण मांजरेकर को उम्मीदवार बनाया है।
संख्याबल पूरी तरह बहुजन विकास आघाड़ी के पक्ष में है, जबकि बीजेपी बहुमत से काफी दूर है। इसके बावजूद उम्मीदवार उतारकर बीजेपी ने बविआ की राजनीतिक टेंशन जरूर बढ़ा दी है। सवाल यह है कि क्या बीजेपी 58 के ‘मैजिक फिगर’ तक पहुंचकर बहुजन विकास आघाड़ी के नगरसेवकों को तोड़ पाएगी? फिलहाल बीजेपी के पास 44 सदस्य हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मतदान में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो महापौर बहुजन विकास आघाड़ी का ही बनेगा।
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वसई-विरार महापौर चुनाव में बीजेपी ‘मैजिक फिगर’ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने वसई-विरार शहर में अच्छा प्रदर्शन किया था, जिसमें बविआ के तीनों विधायक हार गए थे। हालांकि, नगर निगम चुनाव में बविआ ने वापसी करते हुए अपना वर्चस्व बरकरार रखा, जबकि बीजेपी विधानसभा जैसा प्रदर्शन दोहरा नहीं पाई। वसई-विरार मनपा की कुल 115 सीटों में से बविआ को 71, बीजेपी को 43, शिवसेना (शिंदे गुट) को 1 और कांग्रेस को 1 सीट मिली है।
यदि बीजेपी महापौर बनाने में असफल रहती है, तो उसे कम से कम 10 साल बाद प्रतिपक्ष के नेता का पद जरूर मिलेगा। वर्ष 2009 में मनपा गठन के बाद 2010 में हुए पहले चुनाव में बविआ ने 89 में से 64 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी। उस समय 2015 तक विनायक निकम प्रतिपक्ष के नेता रहे।
2015 के दूसरे चुनाव में बहुजन विकास आघाड़ी ने 115 में से 106 सीटें जीत ली थीं, जिससे विपक्ष लगभग समाप्त हो गया और प्रतिपक्ष का नेता नहीं बन सका। अब 2025 के चुनाव में पहली बार बविआ और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। सत्ता के लिए जोड़-तोड़ कर रही बीजेपी को प्रतिपक्ष नेता का पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है।
(इनपुट: सूर्यप्रकाश मिश्र)