
Chandur Bazar urea shortage (सोर्सः सोशल मीडिया)
Chandur Bazar Urea Shortage: चांदुर बाजार तहसील के शिरजगांव कसबा सहित आसपास के कई गांवों में यूरिया खाद की भारी किल्लत से किसान परेशान हैं। रबी फसलों की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। गेहूं, चना और प्याज जैसी प्रमुख फसलों के लिए इस समय यूरिया बेहद आवश्यक है, लेकिन समय पर खाद उपलब्ध न होने से किसान चिंता में हैं।यूरिया की कमी के कारण रबी की फसलों पर संकट मंडराने लगा है। सिंचाई के बाद यूरिया न मिलने से गेहूं, चना और प्याज की फसलें पीली पड़ने लगी हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
तहसील में पिछले कई दिनों से यूरिया की किल्लत बनी हुई है। किसान एक बाजार से दूसरे बाजार खाद की तलाश में भटक रहे हैं। इस बीच, कुछ खाद विक्रेताओं द्वारा निर्धारित कीमत से अधिक दामों पर यूरिया बेचे जाने के आरोप भी सामने आए हैं। किसानों को कालाबाजारी की आशंका सता रही है। किसानों का कहना है कि इस गंभीर समस्या पर जनप्रतिनिधियों का भी ध्यान नहीं है, जिससे वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश से सटे महाराष्ट्र के कई गांवों से बड़े पैमाने पर यूरिया की कालाबाजारी की जा रही है। यूरिया को अधिक दामों पर मध्य प्रदेश में बेचा जा रहा है, जिससे सीमावर्ती गांवों में कृत्रिम किल्लत पैदा हो गई है। किसानों का आरोप है कि संबंधित विभाग कालाबाजारी रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। किसानों ने मांग की है कि कालाबाजारी पर रोक लगाकर तुरंत यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
तहसील कृषि अधिकारी प्रवीण मोहोड ने बताया कि गेहूं की बुआई के बाद यूरिया की मांग बढ़ गई है, जिसकी वजह से कुछ दुकानों पर अस्थायी कमी देखी जा रही है। तहसील में कुल मिलाकर यूरिया की भारी कमी नहीं है। रैक लगी हुई है और जल्द ही सभी जगह यूरिया उपलब्ध हो जाएगा। यदि मध्य प्रदेश में अधिक दामों पर बिक्री को लेकर लिखित शिकायत मिलती है, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।
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शिरजगांव कसबा के किसान शोएब शेख ने कहा कि गेहूं की फसल के लिए यूरिया बेहद जरूरी है। समय पर खाद नहीं मिलने पर उत्पादन में निश्चित रूप से कमी आएगी। एक अन्य किसान तिलक सिंह ठाकुर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से यूरिया की भारी किल्लत है। खाद आते ही दुकानदार देने से इनकार कर रहे हैं और अधिक दामों पर मध्य प्रदेश में बिक्री की जा रही है। तय कीमत से ज्यादा दाम देकर यूरिया खरीदना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय किसानों को भारी परेशानी हो रही है।






