
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Rebellion Candidates In Amravati Municipal Elections: स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण के नगर पालिका और नगर पंचायत चुनाव 2 दिसंबर को होने जा रहे हैं। अमरावती में 4 वर्ष बाद चुनाव होने से कार्यकर्ताओं में उत्साह था, लेकिन उम्मीदवारों को टिकट न मिलने से कई जगह नाराजगी बढ़ गई है।
वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नेताओं के परिजनों को टिकट देने से कई इच्छुकों ने पार्टी बदल ली है, जबकि कुछ ने निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल किया। नतीजतन 12 नगराध्यक्ष पद के लिए 127 और 278 सदस्य पदों के लिए 1,821 नामांकन दाखिल हुए हैं। इससे वोट बंटवारे की आशंका बढ़ गई है।
चुनाव नजदीक आने पर दोनों आघाड़ियों की पार्टियों ने साथ मिलकर लड़ने की रणनीति छोड़कर अलग-अलग चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। बदलते राजनीतिक माहौल के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है, लेकिन दोनों आघाड़ियों की प्रमुख पार्टियों को सत्ताविरोधी हवा का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए यह चुनाव हर दल की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है।
अमरावती जिले में महायुति के 8 में से 7 विधायक हैं। भाजपा के सबसे ज्यादा विधायक हैं। युवा स्वाभिमान के एक और अजित पवार गुट के दो विधायक हैं, जबकि दर्यापुर से महाविकास आघाड़ी का एक विधायक है। लोकसभा स्तर पर भाजपा और कांग्रेस के पास एक-एक सांसद हैं। इसके बावजूद टिकट न मिलने से कई कार्यकर्ताओं ने बगावत का रास्ता चुना है। कुछ ने सीधे पार्टी छोड़ दी जबकि कई निर्दलीय मैदान में उतर गए, जिससे दोनों आघाड़ियों के सामने वोट बंटने की चुनौती बढ़ गई है।
भाजपा : मजबूत नेटवर्क के बावजूद सबसे ज्यादा बागी इसी पार्टी में दिखाई दे रहे हैं। दर्यापुर, अंजनगांव सुर्जी और धामनगांव में इन-हाउस चयन से कार्यकर्ता असंतोष बढ़ा। कई ने निर्दलीय नामांकन भरा है, जिससे भाजपा के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस: पारंपरिक क्षेत्रों में मजबूती की कोशिश कर रही है। दर्यापुर और मोर्शी में अंदरूनी असंतोष है। कई जगहों पर स्थानीय नेतृत्व का असर उम्मीदवारी में साफ दिख रहा है।
शिवसेना (यूबीटी): सहानुभूति लहर के बावजूद संगठन कमजोर है। युवा और सक्रिय कार्यकर्ता उतारे गए हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी: जिले में सदस्य संख्या अधिक है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व का अभाव है। कई शहरों में अध्यक्ष पद पर स्पष्ट नेतृत्व न होने से वोट बिखराव की आशंका है।
शिवसेना: सीमित संगठन, पर कई जगह प्रभावी उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। बागियों को आकर्षित करने की रणनीति अपनाई जा रही है। दर्यापुर और अंजनगांव सुर्जी में बागियों को अपनी ओर खींचने की शिंदे गुट की रणनीति दिख रही है।
यह भी पढ़ें:- Nashik: सोमैया के गंभीर आरोप, मालेगांव में 103 जन्म प्रमाण पत्र रद्द
दर्यापुर: सभी दलों के बागी मैदान में, सबसे ज्यादा वोट बंटने की संभावना है। जिले में कांग्रेस के सांसद दर्यापुर से सांसद बलवंत वानखड़े हैं। बीजेपी, कांग्रेस, शिंदे सेना, यूबीटी और अजित पवार गुट में बागियों की संख्या सबसे ज्यादा है।
अंजनगांव सुर्जी: बीजेपी और शिंदे गुट के बीच अंदरूनी झगड़े निर्णायक होते जा रहे हैं। यहां महायुति की आंतरिक टक्कर हो सकती है।
मोर्शी: भाजपा, कांग्रेस और एनसीपी (अजित गुट) में त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत है।
महाविकास आघाड़ी हो या महायुति, दोनों आघाड़ी में बागियों की संख्या को देखते हुए वोटों का बंटवारा सभी पार्टियों का मुख्य दुश्मन होने वाला है। हालांकि फाइनल उम्मीदवार की सूची नामांकन वापिस लेने की प्रक्रिया के बाद साफ होगी। 2 दिसंबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव जिले की राजनीति भविष्य तय करेंगे।






