अमरावती: महिला सशक्तिकरण के नाम पर 'कर्ज का जाल', 48% तक ब्याज वसूल रहीं माइक्रोफाइनेंस कंपनियां

Amravati Women Empowerment: अमरावती में माइक्रोफाइनेंस कंपनियां 24–48% ब्याज लेकर महिलाओं को कर्ज में फंसा रही हैं। सामूहिक गारंटी व वसूली दबाव से पारिवारिक तनाव बढ़ा, निगरानी तंत्र की मांग है।
In Amravati, microfinance firms are charging up to 48% interest, trapping SHGs in debt. Harassment by recovery agents is causing mental stress. Locals demand RBI and NABARD's urgent intervention.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Microfinance Regulatory Framework News: अमरावती में महिला सशक्तिकरण के नाम पर कार्यरत माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले में स्वयं सहायता बचत समूहों (एसएचजी) को आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, बीमा प्रीमियम, लेट फीस और अन्य दंडात्मक शुल्कों के कारण महिलाओं पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

24 से 48 प्रतिशत तक प्रभावी ब्याज दर

सूत्रों के अनुसार अमरावती जिले में वर्तमान में लगभग 30 से 40 माइक्रोफाइनेंस कंपनियां सीधे या एजेंटों के माध्यम से सक्रिय हैं। ये कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के दायरे में आती हैं, लेकिन शिकायत है कि सभी शुल्क मिलाकर प्रभावी वार्षिक ब्याज दर 24 से 48 प्रतिशत तक पहुंच रही है। साप्ताहिक या पखवाड़ेवार वसूली की शर्त के कारण अनियमित आय वाले समूहों पर भारी दबाव बनता है। बढ़ती शिकायतों के बीच अब यह देखना होगा कि संबंधित नियामक संस्थाएं जिले में प्रभावी निगरानी और राहत तंत्र स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

सामूहिक जिम्मेदारी बनी दबाव का कारण

बचत समूहों में 'सामूहिक गारंटी' की व्यवस्था व्यवहार में दंडात्मक साबित हो रही है। एक सदस्य के भुगतान न करने पर पूरे समूह पर दबाव डाला जाता है। कुछ स्थानों पर वसूली एजेंटों द्वारा देर रात तक गांव में रुककर दबाव बनाने और लगातार फोन कॉल करने की शिकायतें भी सामने आईं हैं। इससे महिलाओं पर मानसिक तनाव बढ़ रहा है और पारिवारिक कलह की स्थिति बन रही है।

निगरानी तंत्र पर सवाल

माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के रूप में पंजीकृत होती हैं और इन पर भारतीय रिजर्व बैंक के नियम लागू होते हैं। साथ ही स्वयं सहायता समूहों की संरचना में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की भी भूमिका रहती है। इसके बावजूद अमरावती जिला स्तर पर त्वरित और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र के अभाव का आरोप महिला समूह लगा रहे हैं। कई मामलों में ऋण वितरण से पहले आय क्षमता और व्यवसाय की व्यवहार्यता का समुचित आकलन नहीं किया जाता, जिससे कर्ज की राशि घरेलू खर्च में चली जाती है और पुनर्भुगतान का संकट गहराता है।

पारदर्शी हो ब्याज दर

अधिवक्ता श्याम राठी ने बताया की माइक्रोफाइनेंस व्यवस्था को मारोता दरों की स्पष्ट घोषणा, सभी शुल्कों का खुला विवरण, आय-आधारित ऋण सीमा और जिला स्तर पर शिकायत प्रकोष्ठ अनिवार्य किया जाना चाहिए। अन्यथा महिला सशक्तिकरण के नाम पर कर्ज का जाल और गहराने की आशंका है।

अब तक कोई शिकायत नहीं

सहायक निबंधक अनिकेत जोशी ने बताया की माइक्रोफाइनेंस कंपनियां आरबीआई के नियंत्रण में कार्य करती है. यदि किसी बचत समूह को समस्या होती है। तो दुय्यम निबंधक कार्यालय पहला प्रशासनिक आधार है। अब तक इस प्रकार की कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

Navbharat Live
navbharatlive.com