मुंबई और हैदराबाद नहीं, इन दो शहरों में भारत की 50% AI नौकरियां; ताजा रिपोर्ट में हुआ खुलासा

AI Job Cities: सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा कि एआई अब केवल चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह भारत की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की विकास गाथा का अहम हिस्सा बन चुका है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, (कॉन्सेफ्ट फोटो)
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Top AI Job Cities India 2026: बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु और दिल्ली-एनसीआर मिलकर देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी 50 प्रतिशत से अधिक नौकरियों का हिस्सा रखते हैं। इनमें अकेले बेंगलुरु की हिस्सेदारी 25.4 प्रतिशत है। सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2025 तक नौकरी डॉट कॉम पर उपलब्ध 64,500 से अधिक सक्रिय नौकरी लिस्टिंग के विश्लेषण में पाया गया कि दिल्ली-एनसीआर की हिस्सेदारी 24.8 प्रतिशत और मुंबई की 19.2 प्रतिशत है।

इन तीनों शहरों को मिलाकर देश की लगभग 70 प्रतिशत एआई से जुड़ी नौकरियां इन्हीं क्षेत्रों में केंद्रित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग (सॉफ्टवेयर और क्वालिटी एश्योरेंस), डेटा साइंस व एनालिटिक्स और कस्टमर सक्सेस, सर्विस और ऑपरेशंस एआई भर्ती को बढ़ावा देने वाले टॉप तीन प्रमुख क्षेत्र हैं।

AI अब केवल तकनीकी विकास नहीं

कंपनी का कहना है कि यह रुझान दिखाता है कि एआई अब केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवसाय के फ्रंट-एंड कार्यों में भी तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत केवल एआई के लिए कोड नहीं लिख रहा है, बल्कि यह भी तय कर रहा है कि इसे वैश्विक उपभोक्ताओं के लिए कैसे लागू और संचालित किया जाए। एआई से जुड़ी नौकरियों में बढ़ोतरी का असर ऑफिस स्पेस की मांग पर भी दिख रहा है। 2025 में ऑफिस लीजिंग में बेंगलुरु 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आगे रहा। कुल ऑफिस लीजिंग गतिविधि 82.6 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई।

इसके अलावा, देश में कुल जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) लीजिंग गतिविधि का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा भी बेंगलुरु ने हासिल किया।दिल्ली-एनसीआर में केवल आईटी ही नहीं, बल्कि कंसल्टिंग, फिनटेक, हेल्थकेयर और पब्लिक सेक्टर जैसी विभिन्न क्षेत्रों से भी एआई की मजबूत मांग देखी जा रही है।

भारत के आर्थिक विकास में अहम

सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और एमईए) अंशुमन मैगजीन ने कहा कि एआई अब केवल चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह भारत की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की विकास गाथा का अहम हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि एआई पेशेवरों की बढ़ती मांग सिर्फ रोजगार का ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि वैश्विक कंपनियां अब भारत को केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि संपूर्ण नवाचार केंद्र के रूप में देख रही हैं। यह बदलाव भारत की आर्थिक संरचना और वैश्विक डिजिटल मूल्य शृंखला में उसकी स्थिति को नया रूप देगा।

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