
अकोला न्यूज
Akola Teacher Transfer Scam: अकोला जिला परिषद का शिक्षा विभाग एक बार फिर शिक्षक तबादला प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विवादों में है। संदिग्ध दिव्यांग प्रमाणपत्रों और चिकित्सीय दस्तावेजों की जाँच में सहयोग न करने पर प्राथमिक शिक्षणाधिकारी रतनसिंह पवार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिले के सभी सात गट शिक्षणाधिकारियों (BEO) को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर प्रशासन में खलबली मचा दी है।
वर्ष 2025 की शिक्षक तबादला प्रक्रिया में गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता गणेश कुरई ने दावा किया है कि कई शिक्षकों ने पति-पत्नी के मुख्यालय के बीच की दूरी के फर्जी दस्तावेज, फर्जी दिव्यांग (UDID) प्रमाणपत्र और गंभीर बीमारियों के झूठे मेडिकल सर्टिफिकेट पेश कर तबादला प्रक्रिया का अनुचित लाभ उठाया है। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर सुगम क्षेत्रों में नियुक्तियां पाने का संदेह जताया जा रहा है।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए शिक्षणाधिकारी रतनसिंह पवार ने पहले ही पंचायत समितियों के माध्यम से त्रिस्तरीय स्वतंत्र जाँच समिति गठित करने के आदेश दिए थे। हालांकि, दो गट शिक्षणाधिकारियों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट अत्यंत भ्रामक पाई गई। जब शिक्षणाधिकारी ने पुनः संशोधित और विस्तृत रिपोर्ट मांगी, तो सभी सातों गट शिक्षणाधिकारियों ने जानकारी साझा करने में टालमटोल शुरू कर दी। अधिकारियों के इस असहयोग को अनुशासनहीनता मानते हुए अब नोटिस जारी किया गया है।
शिक्षणाधिकारी रतनसिंह पवार ने अपने नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी सात गट शिक्षणाधिकारी अगले तीन दिनों के भीतर दिव्यांग शिक्षकों के यूडीआईडी (UDID) प्रमाणपत्र और उनकी बीमारी से संबंधित मूल जानकारी प्रस्तुत करें। उन्होंने पत्र के माध्यम से सख्त चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सटीक जानकारी नहीं दी गई, तो इसे कर्तव्य में लापरवाही माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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इस कार्रवाई के बाद उन शिक्षकों में डर का माहौल है जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या गट शिक्षणाधिकारी समय पर रिपोर्ट सौंपेंगे या जाँच की आंच उन तक भी पहुंचेगी।






