

Marathi Language Compulsory News: राज्य की कक्षाओं पहली से दसवीं तक की स्कूलों में मराठी भाषा की पढ़ाई और अध्ययन अनिवार्य कर दी गई है। इस नियम का पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने का अधिकार शिक्षा विभाग को दिया गया है, ऐसी जानकारी राज्य के शालेय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने दी।राज्य की प्रचलित भाषा नीति के अनुसार, राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा की पढ़ाई और अध्ययन अनिवार्य किया गया है।
हालांकि, कुछ स्कूलों में मराठी भाषा नहीं पढ़ाई जा रही थी, ऐसी शिकायतें राज्य सरकार को मिली थी। इस संदर्भ में राज्य के शालेय शिक्षा विभाग ने मराठी भाषा न पढ़ाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने का निर्णय लिया है। शासन का आदेश 17 अप्रैल को जारी किए जाने की जानकारी शिक्षा राज्यमंत्री भोयर ने दी है। अधिनियम 2020 दिनांक 1 अप्रैल 2020 से लागू किया गया था और समयसमय पर सूचनाएं दी जाती रही हैं।
नए आदेश में भी अतिरिक्त निर्देश शामिल किए गए हैं।सभी निजी और बोर्ड के स्कूलों में मराठी भाषा पढ़ाने के लिए शिक्षक नियुक्त करने के आदेश दिए गए हैं। स्कूलों में इस आदेश का पालन हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा उपनिदेशक, शिक्षा अधिकारी, शिक्षा निरीक्षक की टीम बनाई जाएगी, जिसमें मराठी विषय के अनुभवी और योग्य शिक्षक शामिल होंगे।
मराठी भाषा के पालन की जांच स्कूल शुरू होने के दो महीनों के भीतर की जाएगी और उसका रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को प्रस्तुत करनी होगी। इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूल प्रबंधन को नोटिस दी जाएगी और उनसे 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, जो विभागीय उपनिदेशक को सौंपना होगा।
अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन करने पर, धारा 121 के अनुसार स्कूल प्रबंधन पर एक लाख रुपये का जुर्माना और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी यदि स्कूल प्रबंधन आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता रद्द कर दिए जाने की जानकारी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. भोयर ने दी।