जब गांव में लोगों को बुखार, खांसी, सिरदर्द, सर्दी, जुकाम आदि व्याधियां होती हैं तो वे आज भी झोलाछाप डॉक्टरों का ही सहारा लेते हैं। कई झोलाछाप डॉक्टर मामूली दवाएं देकर लोगों का स्वास्थ्य ठीक कर देते हैं तो कई डॉक्टर डिग्री डिप्लोमा के बिना गलत इलाज कर देते हैं जिससे लोगों की जान पर बन आती है। इस सबके बावजूद ग्रामवासी ऐसे लोगों से ही इलाज करवाते हैं क्योंकि सरकारी अस्पताल गांव से दूर हैं। जैसे-तैसे अस्पताल पहुंच जाएं तो कभी डॉक्टर नहीं मिलते।