रेत की किल्लत: घाटों की नीलामी में देरी से घरकुल योजनाओं के पहिए थमे, लाभार्थियों का इंतजार बढ़ा

Akola Sand Ghat Auction: अकोला में रेत की कमी से घरकुल योजनाओं का काम ठप पड़ा है। नीलामी में देरी और खनिकर्म विभाग की सुस्ती के चलते पात्र लाभार्थियों को 5 ब्रास मुफ्त रेत मिलने का सपना अब भी अधूरा है।
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प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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Akola News in hindi: अकोला जिले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं के अंतर्गत घरकुल निर्माण का सपना देख रहे हजारों लाभार्थियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सरकार की ओर से पात्र लाभार्थियों को पांच ब्रास निःशुल्क रेत उपलब्ध कराने का निर्णय तो लिया गया, लेकिन प्रशासनिक देरी और रेत घाटों की नीलामी प्रक्रिया में आ रही अड़चनों ने इस योजना के क्रियान्वयन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। रेत की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीण इलाकों में निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं।

खनिकर्म विभाग की सुस्ती से कई विभाग परेशान

ग्रामीण विकास यंत्रणा ने जून माह में ही खनिकर्म विभाग को घरकुल लाभार्थियों के लिए रेत उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा था। सरकार के आदेशानुसार, इन लाभार्थियों से कोई स्वामित्व धन (Royalty) नहीं लिया जाना था। हालांकि, मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर होने के कारण यह नियोजन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। सितंबर में मानसून खत्म होने के बाद उत्खनन शुरू हुआ, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी एक भी लाभार्थी को उनके हिस्से की रेत प्राप्त नहीं हुई है। खनिकर्म विभाग की इस ओर अनदेखी ने आम नागरिकों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है।

पर्यावरण अनुमति का पेंच लगाकर कर रहे देरी

जिले में कुल 37 रेत घाट चिन्हित किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 15 घाटों को ही पर्यावरण विभाग की आवश्यक अनुमति मिल सकी है। खनिकर्म विभाग ने पांच बार निविदाएं (Tenders) आमंत्रित कीं, लेकिन अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई। नई रेत नीति के तहत नवंबर और दिसंबर में फिर से प्रयास किए गए, जिसके बाद अब तक 38 में से केवल 16 घाटों की नीलामी सफल हो पाई है। शेष 22 घाटों की प्रक्रिया अभी भी अधर में लटकी हुई है।

घरकुलों के लिए 10 प्रतिशत रेत है आरक्षित

नीलामी के लिए उपलब्ध कुल 48,651 ब्रास रेत में से 10 प्रतिशत यानी 4,865 ब्रास रेत घरकुल योजनाओं के लिए आरक्षित रखी जानी है। शेष रेत को न्यूनतम 600 रुपये प्रति ब्रास की दर से नीलाम किया जा रहा है। अब तक जिन 16 घाटों की नीलामी हुई है, उनसे लगभग 50,472 ब्रास रेत के उत्खनन की संभावना है।

तहसीलवार घाटों की नीलामी स्थिति

अकोला तहसील में कपिलेश्वर, वडद खुर्द, एकलारा, कटियार, म्हैसांग और उगवा घाटों पर नजर है। अकोट तहसील में केलीवेली, पिलकवाड़ी, निंबा, सागद और नागद जैसे प्रमुख घाटों की नीलामी प्रस्तावित है। हाल ही में बालापुर तहसील के लोहारा-1, हाता, काझीखेड़ और मूर्तिजापुर के लाखपुरी व वीरवाड़ा जैसे घाटों की नीलामी संपन्न हुई है। तेल्हारा तहसील में बाभुलगांव और पातुर्डा घाटों से भी राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

समय पर कार्रवाई की मांग

अकोला जिले में रेत की सीमित उपलब्धता और नीलामी में हो रही लगातार देरी ने न केवल सरकारी योजनाओं को प्रभावित किया है, बल्कि निजी निर्माण क्षेत्र पर भी असर डाला है। खनिकर्म विभाग को चाहिए कि वह शेष 22 घाटों की नीलामी जल्द संपन्न कराए और पर्यावरण विभाग से समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त घाटों की अनुमति प्राप्त करे, ताकि घरकुल लाभार्थियों को राहत मिल सके और उनके घर बनकर तैयार हो सकें।

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