DPC में 333 करोड़ हुए मंजूर, 6 महीने में सिर्फ 4.09 करोड़ रुपये खर्च, फिर वापस देनी पड़ेगी निधि?

Akola Latest News: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अकोला जिले के लिए 333 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली। इसमें से केवल 4.09 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है।
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Akola News: वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले को वार्षिक योजना के अंतर्गत 333 करोड़ रुपये की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। इसमें से प्रथम चरण के लिए 101 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि जिला नियोजन समिति (डीपीसी) को प्राप्त हो चुकी है। बावजूद इसके, अब तक केवल 4 करोड़ 9 लाख 37 हजार रुपये ही खर्च किए गए हैं। वहीं, 14 करोड़ 81 लाख रुपये के कार्यों को प्रशासकीय मंजूरी दी गई है।

यह स्थिति तब है जब वित्तीय वर्ष का आधा हिस्सा बीत चुका है, जिससे योजनाओं की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं। जिले की विभिन्न योजनाओं के लिए डीपीसी को सरकार से निधि प्राप्त होती है, जिसमें सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और उपयोजनाएं शामिल होती हैं। इस वर्ष विभिन्न विभागों ने कुल 963.32 करोड़ रुपये की मांग की थी, जबकि सरकार ने 243.96 करोड़ की वित्तीय मर्यादा तय की।

प्रशासकीय कार्यों को मंजूरी

अतिरिक्त 190 करोड़ की मांग के बाद अंततः 333 करोड़ की मंजूरी दी गई। इसमें से अब तक केवल 14.81 करोड़ रुपये के कार्यों को प्रशासकीय मंजूरी मिली है। इसमें महानगरपालिका द्वारा 2.81 करोड़, वन विभाग द्वारा 26 लाख और महाराष्ट्र ऊर्जा विकास अभिकरण (महाऊर्जा) द्वारा शेष राशि खर्च की गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्राप्त निधि के अनुपात में कार्यों की गति अत्यंत धीमी है।

पिछले वर्ष की देरी से सबक जरूरी

पिछले वर्ष भी 300 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे, जिनमें से 29 करोड़ खर्च नहीं हो सके। अंतिम समय में बीडीएस प्रणाली में तकनीकी अड़चनों के कारण निधि संबंधित विभागों तक नहीं पहुंच पाई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ऐसी देरी न हो, इसके लिए डीपीसी को समयबद्ध और प्रभावी योजना बनानी होगी।

आचारसंहिता बन सकती बाधा

वर्तमान में नगर परिषद, महानगरपालिका, जिला परिषद और पंचायत समितियों की प्रभाग रचना प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। ओबीसी आरक्षण के साथ चुनाव की घोषणा संभावित है। ऐसे में आचारसंहिता लागू होने पर नए निर्णयों पर रोक लग सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, उपलब्ध निधि का शीघ्र और प्रभावी उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

धीमी गति के कारण विकास में विलंब

निधि खर्च की धीमी गति के कारण आधारभूत सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाएंगी। जिससे जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। यदि समयसीमा के भीतर निधि खर्च नहीं हुई, तो सरकार द्वारा अप्रयुक्त राशि वापस ली जा सकती है, जैसा कि पिछले वर्ष हुआ था।

बार-बार तकनीकी कारणों या प्रक्रिया की जटिलताओं का हवाला देकर निधि खर्च न कर पाना, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। आगामी स्थानीय चुनावों के चलते आचारसंहिता लागू होने की संभावना है, जिससे नई मंजूरी और खर्च पर रोक लग सकती है। ऐसे में उपलब्ध निधि का शीघ्र उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

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