2 मार्च से भूमि अभिलेख कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, विखे पाटिल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा

Radhakrishna Vikhe Patil Meeting: महाराष्ट्र में भूमि अभिलेख कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया, चेतावनी दी कि 2 मार्च से काली रिबन के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी।
Maharashtra land records protest
black ribbon agitation (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Maharashtra Land Records Protest: राज्य भर के भूमि अभिलेख विभाग (लैंड रिकॉर्ड्स) के कर्मचारियों ने सरकार द्वारा उनकी लंबे समय से लंबित तकनीकी और प्रशासनिक मांगों की अनदेखी के विरोध में आंदोलन का ऐलान किया है। लैंड रिकॉर्ड्स एम्प्लॉइज एक्शन कमिटी, महाराष्ट्र स्टेट ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो कर्मचारी 2 मार्च से काली रिबन पहनकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने जल संसाधन व पालकमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल से मुलाकात कर विरोध ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तकनीकी वेतनमान लागू करने, भूमि सर्वेयर और संरक्षण भूमि सर्वेयर के बढ़े हुए पदों के अनुरूप संशोधित ढांचे को मंजूरी देने, सर्वेयर के यात्रा भत्ते को वेतन में समाहित करने तथा विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।

अधिकारियों का तबादला न किया जाए

इसके अलावा कर्मचारियों ने मांग की कि बिना तकनीकी जानकारी वाले अधिकारियों का इस विभाग में तबादला न किया जाए, फार्म रोड सर्वे संबंधी सरकारी निर्णय में संशोधन किया जाए और जमाबंदी आयुक्त का पद भारतीय इंजीनियरिंग सेवा से भरा जाए।

कर्मचारियों पर आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया बंद करने की मांग

कर्मचारियों ने प्रशासनिक स्तर पर e-Census 2.0 सॉफ्टवेयर को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने, बिना अनुमति कर्मचारियों के खिलाफ सीधे आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया रोकने, प्रत्येक कर्मचारी को लैपटॉप और रोवर जैसे उपकरण उपलब्ध कराने तथा अतिरिक्त कार्य के लिए पारिश्रमिक देने की मांग भी उठाई है। प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद मंत्री विखे पाटिल ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से चर्चा करेंगे। इस अवसर पर संग्राम वडिताके, विजय हरिश्चंद्र, महेश हरिश्चंद्र, बालासाहेब गायकवाड़, गणेश दलवी, धनंजय राउत, ज्ञानदेव खुरपे, अन्नासाहेब चिंधे, कैलाश डफल और उमाकांत भागवत उपस्थित थे।

काउंटिंग कार्य प्रभावित होने की आशंका

आंदोलन का नेतृत्व राज्य समन्वयक सुनील गोडसे, विभूति चंद्र गजभिये, पवन केवटे, राहुल पाटिल, किशोर इंगले, दीपाली मुरकुटे, सूरज रामटेके, विवेक कोठाले, कमलाकर पोतदार, संजय बोर्डे, अभय पाटिल और धनाजी बाबर कर रहे हैं। समिति ने चेतावनी दी है कि कर्मचारियों के वैध अधिकारों की लड़ाई के कारण काउंटिंग का काम प्रभावित हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, राज्य के मुख्य सचिव तथा राजस्व और वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को भी भेजी गई हैं।

तय कार्यक्रम: काली रिबन से लेकर हड़ताल तक

घोषित कार्यक्रम के अनुसार 18 फरवरी को कर्मचारी गणना सामग्री एकत्र कर काली रिबन बांधकर काम करेंगे। 20 फरवरी से गणना कार्य पूरी तरह रोक दिया जाएगा और 23 से 26 फरवरी तक राज्यभर में सामूहिक अवकाश आंदोलन होगा। इसके बाद 27 फरवरी को पुणे में जमाबंदी आयुक्त कार्यालय पर ‘आक्रोश मोर्चा’ निकाला जाएगा। यदि इसके बाद भी सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाया, तो 2 मार्च 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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