अकोला मनपा में स्वीकृत सदस्य पदों के लिए मची होड़, भाजपा-कांग्रेस समेत सभी दलों में अंदरूनी घमासान तेज

Akola News: अकोला मनपा में स्थायी समिति चुनाव बाद स्वीकृत 8 सदस्य पदों पर सत्ताधारी-विपक्ष में तीखी दावेदारी है। भाजपा आघाड़ी को 4, कांग्रेस, शिवसेना (ठाकरे) व वंचित को शेष मिलने की संभावना है।
Political heat rises in Akola Municipal Corporation over 8 co-opted member seats. BJP, Congress, and VBA face internal pressure as numerous aspirants vie for these key influential positions
अकोला महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया )
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Akola Municipal Corporation News: अकोला महानगरपालिका की स्थायी समिति सदस्यों के चुनाव के बाद अब स्वीकृत सदस्य पदों की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कुल 8 पदों के लिए सत्ताधारी और विपक्षी दलों में इच्छुकों की भीड़ देखी जा रही है। विशेष रूप से भाजपा-प्रणित शहर सुधार आघाड़ी में आंतरिक प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, आठ में से चार पद भाजपा आघाड़ी को मिलने की संभावना है। इस कारण कई पूर्व पार्षद और पराजित उम्मीदवारों के नामों पर गंभीर विचार हो रहा है। बढ़ती स्पर्धा और संभावित नाराजगी को देखते हुए भाजपा ने सामाजिक संतुलन और पक्ष निष्ठा को आधार मानकर चयन प्रक्रिया करने की तैयारी की है। कांग्रेस और अन्य दलों में दावेदारी कांग्रेस में भी स्वीकृत सदस्य पद के लिए बड़ी स्पर्धा दिखाई दे रही है।

लगभग 20 से अधिक इच्छुकों ने दावेदारी जताई है, जिनमें अल्पसंख्यक समाज के नेताओं का भी आग्रह शामिल है। स्थानीय नेतृत्व ने अंतिम निर्णय प्रदेश स्तर पर सौंपा है। स्थायी समिति सभापति पद का चुनाव कुछ दिनों में होने वाला है।

उसके बाद स्वीकृत सदस्य नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी। परिणाम के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। शिवसेना (ठाकरे गुट) को एक पद मिलने की संभावना है, जिसके लिए पुराने और नए नामों पर चर्चा जारी है। वहीं वंचित बहुजन आघाड़ी से भी एक सदस्य चुना जाएगा, जिसका अंतिम निर्णय पार्टी प्रमुख प्रकाश आंबेडकर करेंगे।

स्वीकृत सदस्यों को लेकर चिंतन

यह उल्लेखनीय है कि, सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता अकोला मनपा स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति को लेकर चिंता में दिखाई दे रहे हैं। क्यों कि, सभी पार्टियों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता स्वीकृत सदस्य के पद को लेकर अपनी अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। इस कारण सभी पार्टियों को निर्णय लेना मुश्किल हो रहा है कि किस की नियुक्ति की जाए, एक प्रकार से देखा जाए तो सभी पार्टियों में इस विषय को लेकर असंतोष लगातार उपज रहा है।

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