
Maharashtra first tulip garden: महाराष्ट्र का पहला ट्यूलिप गार्डन (सोर्सः सोशल मीडिया)
Sangamner Tulip Garden: महाराष्ट्र के पहले ट्यूलिप गार्डन का सपना अब साकार हो गया है। अमृतवाहिनी शिक्षण संस्था के कोऑपरेटिव महर्षि भाऊसाहेब थोराट एग्रीकल्चर कॉलेज के परिसर में, नासिक-पुणे नेशनल हाईवे के किनारे स्थित संगमनेर में यह अनोखा ट्यूलिप गार्डन विकसित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी पहल ने पूरे राज्य का ध्यान संगमनेर की ओर आकर्षित किया है। यह अभिनव प्रयोग पूर्व कृषि मंत्री बालासाहेब थोराट की संकल्पना से साकार हुआ है।
ट्यूलिप के फूल सामान्यतः ठंडे मौसम में खिलते हैं। कश्मीर घाटी का ट्यूलिप गार्डन इसी कारण विश्व प्रसिद्ध है, जहां हर साल फरवरी से अप्रैल के बीच लाखों पर्यटक आते हैं। महाराष्ट्र के अपेक्षाकृत गर्म जलवायु वाले अहिल्यानगर जिले में इस कॉन्सेप्ट को लागू करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन बालासाहेब थोराट की दूरदृष्टि, लगन और कृषि अनुभव के कारण यह प्रयोग सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
पूर्व कृषि मंत्री बालासाहेब थोराट हमेशा इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि एग्रीकल्चर कॉलेज केवल शिक्षण संस्थान न होकर, नवाचार और अनुसंधान के केंद्र भी होने चाहिए। इसी सोच के तहत ट्यूलिप गार्डन की परिकल्पना की गई, जिससे छात्रों को विश्वस्तरीय फूलों की खेती का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके और संगमनेर की भौगोलिक विशेषताओं का रचनात्मक उपयोग हो सके।
इस गार्डन के लिए हॉलैंड से उच्च गुणवत्ता वाले ट्यूलिप कंद आयात किए गए। विशेषज्ञ कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में तापमान, मिट्टी की बनावट, सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन की सटीक योजना तैयार की गई। निरंतर मेहनत के बाद गुलाबी, सफेद, पीले, लाल, बैंगनी और नारंगी रंगों सहित आठ विभिन्न किस्मों के ट्यूलिप अब पूरी तरह खिल चुके हैं। रंग-बिरंगे फूलों की कतारें, मनमोहक खुशबू और सुकूनभरा वातावरण ऐसा अनुभव कराते हैं मानो आप कश्मीर की वादियों में आ गए हों। यह ट्यूलिप गार्डन संगमनेर तालुका में एग्री-टूरिज्म को एक नई पहचान दे रहा है।
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पूर्व कृषि मंत्री बालासाहेब थोराट की यह पहल कृषि, अनुसंधान, शिक्षा और पर्यटन का सुंदर संगम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयोग महाराष्ट्र के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और भविष्य में एग्री-टूरिज्म को नई दिशा देगा।






