इंदौर में गंदे पानी से मौतों का आंकड़ा पहुंचा 20, 16 अब भी ICU में लड़ रहे हैं जिंदगी मौत की जंग

Bhagirathpura Death Case: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के प्रकोप से मरने वालों की संख्या 20 हो गई है। प्रशासन ने 18 परिवारों को मुआवजा दिया है, जबकि 16 लोग अभी भी आईसीयू में हैं।
Indore Water Crisis
इंदौर में 20 लोगों की गंदे पानी से मौत, फोटो- सोशल मीडिया
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Indore Contaminated Water Crisis: मध्य प्रदेश के इंदौर में गंदे पानी से मचे हाहाकार के बीच मौतों का आंकड़ा बढ़कर 20 हो गया है। भागीरथपुरा इलाके में जलजनित बीमारियों के फैलने से सैकड़ों लोग प्रभावित हैं। हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और प्रशासन की ओ से मुआवज बांटने के बावजूद इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण हो रही मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है और यह संख्या अब 20 तक पहुंच गई है। हालांकि, प्रशासन और सरकार के आंकड़ों में विरोधाभास नजर आ रहा है; सरकार ने हाई कोर्ट में पेश रिपोर्ट में केवल चार मौतों की पुष्टि की है, जबकि प्रशासन अब तक 18 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दे चुका है।

आज शामिल हुए दो और नाम

बुधवार को प्रशासन ने मुआवजे की सूची में दो नए नाम, रामकली जगदीश और श्रवण खुपराव, शामिल किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वे हर संदिग्ध मौत की सूचना पर क्रॉस-चेक कर रहे हैं ताकि प्रभावित परिवारों को सहायता दी जा सके।

अस्पतालों में अब भी भर्ती हैं ढेरों मरीज

क्षेत्र में संक्रमण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में 16 मरीज आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं, जिनमें से 3 की स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। अब तक इस त्रासदी के कारण कुल 429 लोग अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें से 330 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 99 मरीज अब भी कई अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की 61 टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और अब तक 5013 घरों के 24,786 लोगों से मिलकर उन्हें दवाइयां और इलाज दिया गया है।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख, नगर निगम कमिश्नर नपे

इस मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कड़ी टिप्पणी की है कि देश का सबसे स्वच्छ शहर अब दूषित पानी के कारण पूरे भारत में चर्चा का विषय बन गया है, जिससे शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पानी जनता का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता है। लापरवाही के चलते सरकार ने नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को हटा दिया है, जबकि एडिशनल कमिश्नर और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है।

इलाकों में हो रही मुनादी: पाइपलाइन का पानी इस्तेमाल न करें

वर्तमान में कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल लगातार प्रभावित बस्तियों का दौरा कर रहे हैं और नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज सुधारने के कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा क्षेत्र में मुनादी कराई जा रही है कि लोग फिलहाल पाइपलाइन के पानी का इस्तेमाल न करें और टैंकर से सप्लाई होने वाले पानी को भी उबालकर व छानकर ही पिएं। इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है और मुख्यमंत्री और स्थानीय मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की है।

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