इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का तांडव: 23वीं मौत से मचा हड़कंप, हाई कोर्ट ने नगर निगम को घेरा

Contaminated Water 23rd Death: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से मौतों का सिलसिला जारी है। भगवान भारने की मौत के साथ कुल मृतकों की संख्या 23 हो गई है, जबकि हाई कोर्ट ने प्रशासन से जवाब मांगा है।
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इंदौर के भागीरथपुरा में 23वीं मौत, फोटो- सोशल मीडिया
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Indore Bhagirathpura Contaminated Water Case: स्वच्छता में नंबर वन शहर इंदौर का भागीरथपुरा इलाका वर्तमान में एक भयावह मानवीय त्रासदी का केंद्र बना हुआ है। दूषित पानी के कारण बीमार होने और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक और बुजुर्ग की जान जाने से पूरे क्षेत्र में दहशत और आक्रोश व्याप्त है।

इंदौर के भागीरथपुरा स्थित इमली गली के रहने वाले 65 वर्षीय भगवान भारने की दूषित जल के संक्रमण के कारण मौत हो गई है। जानकारी के अनुसार, उन्हें गंभीर हालत में शेल्बी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। भगवान भारने की मौत के साथ ही इस क्षेत्र में दूषित पानी से मरने वालों का आधिकारिक आंकड़ा अब 23 तक पहुंच गया है। उनकी तस्वीर और इस दुखद घटना ने प्रशासन की दावों की पोल खोल दी है।

21 दिसंबर से शुरू हुआ मौत का तांडव

भागीरथपुरा में दूषित जल का यह संकट अचानक उत्पन्न नहीं हुआ है। हालांकि यह मामला प्रमुखता से 29 दिसंबर को चर्चा में आया था जब एक साथ 100 से अधिक लोग बीमार पड़े थे, लेकिन आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में संक्रमण से पहली मौत 21 दिसंबर को ही हो गई थी। पिछले कई हफ्तों से क्षेत्र में दूषित पानी से पीड़ित मरीज लगातार मिल रहे हैं और मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह स्थिति दर्शाती है कि संक्रमण की जड़ें काफी गहरी हैं और शुरुआती दौर में प्रशासन इसे नियंत्रित करने में विफल रहा।

हाई कोर्ट सख्त: नगर निगम से मांगा जवाब

इस गंभीर मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। दूषित पानी से हो रही मौतों और प्रशासनिक विफलता को लेकर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में मांग की गई है कि प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध और स्वच्छ पेयजल की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। आज इस मामले पर हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। अदालत ने नगर निगम से जवाब तलब किया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन की जवाबदेही तय होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जनहित याचिका के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि भविष्य में किसी भी रहवासी को दूषित जल जैसी बुनियादी समस्या के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े।

जमीनी हालात: टैंकरों के भरोसे जनता और पानी की टेस्टिंग

प्रशासनिक दावों के विपरीत, भागीरथपुरा में जमीनी हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। क्षेत्र के रहवासी वर्तमान में अपनी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से नगर निगम के टैंकरों पर निर्भर हैं। सरकारी टंकियों से नियमित और सुरक्षित जलापूर्ति कब शुरू होगी, इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं की गई है।

हालांकि इंदौर नगर निगम का दावा है कि उनकी टीमें रोजाना पानी की सैंपलिंग और टेस्टिंग कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। लोग अभी भी नलों से आने वाले पानी पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं हैं। भगवान भारने जैसी मौतों ने निवासियों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है, और वे प्रशासन से केवल आश्वासनों के बजाय ठोस समाधान की मांग कर रहे हैं।

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