MP में बड़ा घोटाला...गोबर-गोमूत्र पर रिसर्च के पैसे भी अपनी रईसी पर खर्च कर दिए अफसर

Jabalpur News: मध्य प्रदेश में पंचगव्य योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये के महाघोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। जिस राशि का उपयोग गाय के गोबर और गोमूत्र से कैंसर जैसी बीमारियों पर रिसर्च के लिए होना था।
A major scam in MP... officers spent money meant for research on cow dung and urine on their own wealth
सरकारी योजना राशि पर रईसी करते अफसर। प्रतीकात्मक इमेज, एआई
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MP Scam: मध्य प्रदेश के जबलपुर में पंचगव्य योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। इसमें अधिकारियों ने कैंसल के इलाज के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग घूमने-फिरने और गाड़ियां खरीदने में किया। कलेक्टर की जांच टीम ने पाया है कि योजना के लिए जारी राशि का इस्तेमाल कच्चे माल की अधिक कीमत पर खरीद, हवाई यात्राओं और वाहन खरीदने में किया गया। योजना 2011 में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य गाय के गोबर, गौमूत्र और दूध से बीमारियों पर शोध करना था।

नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय को योजना के लिए करोड़ों रुपये दिए गए थे। इसके तहत डॉ. यशपाल साहनी, डॉ.सचिन कुमार जैन, गिरिराज सिंह समेत अन्य कर्मचारियों को काम करना था। योजना की शुरुआत से घोटाला शुरू हो गया और कुछ साल बाद इसे बंद किया गया। संभाग कमिश्नर धनंजय सिंह को जब घोटाले की जानकारी मिली तो उन्होंने जबलपुर कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के आदेश पर डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह और कोषालय अधिकारी विनायकी ने पूरे मामले की जांच-पड़ताल की।

सरकार से जारी हुए थे 3.5 करोड़ रुपए

जांच में पाया गया कि नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय ने पंचगव्य योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपए शासन से लिए थे। मगर, इसकी स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी कि राशि को किस तरह और कहां खर्च करना है। 1 करोड़ 92 लाख में गोबर, गौमूत्र, गमला, कच्चा पदार्थ और कुछ मशीनों की खरीद की गई। बाजार में इन मशीनों की कीमत 15 से 20 लाख रुपये बताई जा रही।

रिसर्च के नाम पर फ्लाइट से घूमे अफसर

योजना में शामिल अधिकारियों ने रिसर्च के नाम पर 20 से अधिक बार विभिन्न शहर और राज्यों की हवाई यात्राएं कीं। डॉ. यशपाल साहनी, डॉ. सचिन कुमार जैन, रिसर्चर गिरिराज सिंह ने गोवा, हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरु समेत 20 से अधिक शहरों की हवाई यात्रा की। सरकारी पैसों का जमकर बंदरबांट किया गया। जिस पैसों को योजना में खर्च करना था, उससे न केवल हवाई यात्रा की गई, बल्कि 7.5 लाख रुपये की नई कार खरीदी गई। साथ ही 7 लाख रुपये पेट्रोल-डीजल और मेंटनेंस में खर्च किए गए। वाहनों के सुधार के लिए 3 लाख 50 हजार रुपये लेबर पेमेंट के रूप में दिए गए। 15 लाख रुपये के टेबल और इलेक्ट्रॉनिक आइटम खरीद लिए गए।

किसानों को प्रशिक्षण देने का दावा

योजना के नाम पर आए साढ़े तीन करोड़ रुपए को यहां-वहां खर्च किए गए। 2011 में शुरू हुई यह योजना 2018 में बंद हो गई। जांच टीम ने पाया कि 2016 से 2020 तक में कई किसानों को पंचगव्य योजना के नाम पर प्रशिक्षण देने का दावा किया गया है, पर जो लिस्ट सामने आई, उसे सादे कागज में बना रखा था। उसमें शुरुआत के साल में तारीखों का उल्लेख नहीं था। 2016 में 12 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया, पर लिस्ट में तारीख नहीं लिखी थी। इसी तरह 2017 में 44 और 2020 में तीन बार, यानी 18 फरवरी को 24, 29 फरवरी को 21 और मार्च 2020 में 27 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।

अन्य लोग भी हो सकते हैं शामिल

जांच टीम ने पाया कि जब पंचगव्य योजना शुरू हुई थी, तब यशपाल साहनी, सचिन कुमार जैन, गिरिराज सिंह सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच में पाया गया है कि विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। डिप्टी कलेक्टर और विनायिका लकरा की जांच रिपोर्ट कलेक्टर के माध्यम से कमिश्नर तक पहुंच गई है।

सभी रिपोर्ट ऑडिटेड

नानाजी देशमुख पशु विज्ञान महाविद्यालय के कुलगुरु मनदीप शर्मा ने कहा है कि पंचगव्य योजना में जो गड़बड़ी की बात कही जा रही है, यह योजना 2011 से 2018 तक चली थी। यह पुरानी योजना है। इसमें जो काम हुए, उनकी सभी तकनीकी रिपोर्ट और वित्तीय रिपोर्ट फंडिंग जांच एजेंसी को पहले ही उपलब्ध कराए गए थे। सभी रिपोर्ट ऑडिटेड थीं। उस समय किसी तरह की अनियमितता सामने नहीं आई थी।

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