

Yeast Protein Powder: आजकल जिम और फिटनेस की दुनिया में प्रोटीन के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है। इनमें सबसे पहले व्हे प्रोटीन का ख्याल आता है। इसके बाद सोया, मटर और दूसरे प्लांट प्रोटीन और अब प्रोटीन की दुनिया में एक और नाम तेजी से सुनाई दे रहा है- यीस्ट प्रोटीन।
आखिर यीस्ट से प्रोटीन कैसे बनता है? क्या यह वही यीस्ट है, जो ब्रेड या डोसा बनाने में इस्तेमाल होता है? इसे कब और कैसे लेना चाहिए? और क्या यह मसल्स बनाने में मदद करता है?
यीस्ट प्रोटीन एक फर्मेंटेशन से तैयार होने वाला प्रोटीन सोर्स है। इसे नियंत्रित परिस्थिति में यीस्ट सेल्स को बढ़ाकर और फिर उनसे प्रोटीन को इकठ्ठा करके तैयार किया जाता है। कई प्रोडक्ट में Saccharomyces cerevisiae जैसे यीस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
यानी यह सिर्फ खाने में डालने वाला सामान्य यीस्ट नहीं है। प्रोटीन सप्लीमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाला यीस्ट एक खास प्रक्रिया से तैयार और प्रोसेस किया जाता है। यीस्ट बायोमास में अच्छी मात्रा में प्रोटीन और सभी जरूरी अमीनो एसिड पाए जाते हैं।
प्रोटीन हमारे शरीर को अमीनो एसिड देता है और इनमें से 9 एसेंशियल अमीनो एसिड ऐसे हैं जिन्हें शरीर खुद नहीं बना सकता। यीस्ट प्रोटीन में सभी 9 एसेंशियल अमीनो एसिड मौजूद हैं, इसलिए इसे कम्प्लीट प्रोटीन माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग ब्रांड और फॉर्मूलेशन में अमीनो एसिड की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए सिर्फ पैकेट पर लिखे यीस्ट प्रोटीन का नाम देखकर फैसला न लें बल्कि न्यूट्रिशन और इंग्रीडिएंट लेबल को जरूर चेक करें।
व्हे प्रोटीन दूध से मिलता है, जबकि यीस्ट प्रोटीन फर्मेंटेशन प्रक्रिया से तैयार किया जाता है। दोनों में एसेंशियल अमीनो एसिड मिल सकते हैं, लेकिन उनका अमीनो एसिड प्रोफाइल बिल्कुल अलग होता है। व्हे विशेष रूप से ल्यूसीन और दूसरे ब्रांच्ड-चेन अमीनो एसिड के लिए जाना जाता है। वहीं यीस्ट प्रोटीन को डेयरी-फ्री प्रोटीन विकल्प के रूप में देखा जाता है।
शुद्ध यीस्ट प्रोटीन दूध से नहीं आता, इसलिए इसमें लैक्टोज नहीं होता। यही वजह है कि फर्मेंटेशन-आधारित यीस्ट प्रोटीन उन लोगों के लिए भी सही है, जो डेयरी प्रोटीन से बचना चाहते हैं। हर पैकेट की सामग्री एक जैसी नहीं होती। इसलिए अगर आप लैक्टोज या डेयरी से बचते हैं, तो पैकेट पर मौजूद इंग्रेडिएंट लिस्ट जरूर पढ़ें।
अगर आपकी कुल डाइट में पर्याप्त प्रोटीन है और आप नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो यीस्ट प्रोटीन आपकी दैनिक प्रोटीन नीड को पूरी करने में मदद करता है। मसल्स बनाने के लिए सिर्फ प्रोटीन पाउडर लेना पर्याप्त नहीं है। शरीर को पर्याप्त कुल कैलोरी, प्रोटीन, अमीनो एसिड और नियमित रेजिस्टेंस ट्रेनिंग की जरूरत होती है।
अगर आप जिम जाते हैं, तो इसे वर्कआउट के बाद लेना सुविधाजनक होता है। अगर आपका प्रोटीन इंटेक खाने से पूरा नहीं हो पाता है, तो ऐसे में यह आपकी मदद करता है। लेकिन अगर आपने दिन में पहले ही पर्याप्त प्रोटीन लिया है, तो सिर्फ पोस्ट वर्कआउट के नाम पर इसे तुरंत लेना जरूरी नहीं है।
पानी के साथ- एक सर्विंग को पैकेट पर दिए निर्देश के अनुसार पानी में मिलाकर लिया जा सकता है।
दूध या प्लांट मिल्क के साथ- अगर आपका प्रोडक्ट डेयरी-फ्री है और आप दूध लेना चाहते हैं, तो दूध के साथ भी लिया जा सकता है। इससे ड्रिंक का कुल प्रोटीन और कैलोरी दोनों बढ़ेंगे।
ओट्स में- ओट्स तैयार होने के बाद थोड़ा ठंडा होने दें और फिर यीस्ट प्रोटीन मिलाएं। इससे इसे रोज के नाश्ते में शामिल करना आसान हो सकता है।
स्मूदी में- केला, दही-प्लांट मिल्क, फल और यीस्ट प्रोटीन से स्मूदी बनाई जा सकती है।
दही में- कुछ अनफ्लेवर्ड प्रोटीन पाउडर को दही में मिलाया जा सकता है। हालांकि स्वाद और टेक्सचर ब्रांड के अनुसार अलग हो सकता है।
यह व्यक्ति और प्रोडक्ट दोनों पर निर्भर करता है। किसी भी नए प्रोटीन पाउडर से कुछ लोगों को शुरुआत में पेट में भारीपन लग सकता है। इसका कारण सिर्फ प्रोटीन स्रोत नहीं, बल्कि उसमें मौजूद स्वीटनर, फ्लेवर, फाइबर या दूसरे एडेड इंग्रीडिएंट्स भी हो सकते हैं।
प्रति सर्विंग कितना प्रोटीन है?
इंग्रीडिएंट लिस्ट क्या कहती है?
अमीनो एसिड की जानकारी दी गई है या नहीं?
स्वीटनर और एडेड शुगर कितनी है?
टेस्टिंग और गुणवत्ता की जानकारी है या नहीं?