Mental Health: क्या आप भी हर समय काम में उलझे रहते हैं? जानिए मेंटल हेल्थ पर इसका असर
Toxic productivity and mental health: भारत में धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य को अहम समझा जाने लगा है। आज भी सिर्फ मेंटल पीस न मिलने पर लोग सुसाइड कर रहे हैं या फिर डिप्रेशन में जा रहे हैं।
- Written By: रीता राय सागर
मेंटल हेल्थ (फोटो.सोशल मीडिया)
Why being always busy is unhealthy: आज की दुनिया में व्यस्त रहने को ही सफलता माना जाता है। हमेशा काम करते रहना, हमेशा उपलब्ध रहना और हर वक्त भाग-दौड़ करते रहना सफलता का पैरामीटर बन गया है। वर्कप्लेस और सोशल मीडिया के इस कल्चर का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ता है।
जब कि इसके अलावा काम के प्रति अच्छी सोच और पॉजिटिव नजरिया अधिक जरूरी है, लेकिन यदि आप बिना आराम किए लगातार काम कर रहे हैं, तो इसका असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा हो सकता है।
इस आदत को अक्सर टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी कहा जाता है। ये समस्याएं बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन वाले माहौल में और भी गंभीर हो जाती है। टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी के साथ सबसे गंभीर समस्या यह है कि दिमाग और शरीर को आराम करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता। इंसान के दिमाग पर लगातार बहुत अधिक बोझ डालने से ध्यान लगाने की क्षमता, इमोशनल स्टेबिलिटी, डिसीजन मेकिंग कैपेसिटी और शारीरिक स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ सकता है।
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मेंटल हेल्थ (फोटो.सोशल मीडिया)
टॉक्सिक प्रोडक्टिविटी के लक्षण
- जो लोग बाहर से बहुत सफल या कुशल दिखते हैं, अंदर से वे भावनात्मक रूप से थका हुआ महसूस कर सकते हैं। आम तनाव के कारणों में लगातार स्ट्रेस, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी, नींद में गड़बड़ी, आराम की कमी, भावनाओं की कमी, मोटिवेशन में कमी, सिरदर्द और बर्नआउट शामिल हैं।
- ऐसे लोग अपने शौक, लोगों से मेल-जोल या अपनी देखभाल में भी दिलचस्पी खो देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें हमेशा प्रोडक्टिव रहना चाहिए। सोने पर भी उन्हें अपराधबोध या बेचैनी महसूस हो सकती है। कई गंभीर मामलों में डिप्रेशन, पैनिक अटैक, इमोशनल ब्रेकडाउन और लगातार मानसिक थकान हो सकती है।
- सोशल मीडिया भी इस समस्या को बढ़ाने में योगदान देता है। हसल कल्चर और दूसरों से तुलना करने की आदत के कारण इंसान को लग सकता है कि वह पर्याप्त काम नहीं कर रहा है, जबकि वह पहले से ही काम के बोझ तले दबा हुआ है।
मेंटल हेल्थ (फोटो.सोशल मीडिया)
कैसे पाएं इससे निजात
- आराम करने को आलस न समझें। इमोशनल और मानसिक रूप से ठीक होना बहुत जरूरी है। इसमें परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, बीच-बीच में ब्रेक लेना, शौक पूरे करना और भरपूर नींद लेना शामिल है। असल में, जब काम और आराम के बीच सही संतुलन होता है, तो लोग काम के प्रति अधिक प्रोडक्टिव हो पाते हैं।
- काम और स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने, नियमित ब्रेक लेने और खुद को आराम देने से मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।
- हेल्दी लाइफस्टाइल का मतलब हर समय काम करते रहना नहीं है, बल्कि संतुलित और लंबे समय तक चलने वाले तरीके से काम करना है।
