
लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी (डिजाइन फोटो)
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: महिलाएं जहां पर हर किसी परिस्थिति में लड़कर आगे बढ़ना जानती है उतना ही सम्मान पाने के काबिल होती है। ऐसी ही एक महिला जिसका नाम है लक्ष्मी अग्रवाल (Lakshmi Agarwal)। जिनका नाम एसिड अटैक सर्वाइवर (acid attack survivor) नहीं एक अद्भुत महिला के नाम से जाना जाता है। जिन्होंने विपरित परिस्थितियों में हार नहीं मानते हुए अपनी जिंदगी को संवारा और एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए फिर से जीने की उम्मीद पैदा की है। आइए जानते हैं उनकी ये कहानी।
सर्वाइवर और अद्भुत महिला लक्ष्मी अग्रुवाल का जन्म 1 जून 1990 को हुआ था जहां पर बीमारी के चलते पिता और भाई को खोने के बाद मां के साथ लक्ष्मी रहती थी उनकी मां घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाती थी। साल 2005 की बात हैं, बहादुर लक्ष्मी 15 साल की थी और उनके पीछे 32 साल के सिरफिरे इंसान की निगाहें थी। भईया कहकर बुलाने वाली लक्ष्मी नहीं जानती थी कि सिरफिरे के दिमाग में क्या चल रहा है। वहीं आरोपी लक्ष्मी की सहेली का भाई था और लक्ष्मी के भाई की मदद भी की थी। हमेशा से गाने का सपना देखने वाली लक्ष्मी को नहीं पता था कि, जिसे भईया कहती है वह हैवान है लक्ष्मी के इनकार करते ही आरोपी ने एसिड फेंककर लक्ष्मी को घायल कर दिया।
लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी (सोशल मीडिया)
लक्ष्मी का चेहरा इतना जल रहा था कि, उनकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया जैसे तैसे अस्पताल पहुंचने के बाद उन पर 20 बाल्टी पानी डाला गया। लक्ष्मी का चेहरा गल रहा था और उनकी उम्मीदें जीने की कम हो गई थी। सर्जरी के बाद लक्ष्मी के चेहरे को राहत मिली लेकिन जब पहली बार अपना चेहरा देखा तो लक्ष्मी खुद सहम गई। इस दौरान उन्हें सुसाइड के भी ख्याल आए। उस समय ‘समाज वाले, आस-पड़ोस वाले कहते थे कि ये लड़की है और इसे मार देना चाहिए। यही नहीं आस-पड़ोस वाले ये भी कहते थे कि लड़की है इसकी शादी कैसे होगी।
साल 2006 की बात लक्ष्मी अपने साथ हुई इस घटना को किसी औऱ के साथ ना हो इसके लिए लक्ष्मी ने सुप्रीम कोर्ट में PIL डाली थी। इसका फैसला 7 साल बाद 2013 में आया जिसमें एसिड को केवल लाइसेंसी दुकानों पर ही बेचने की अनुमति थी। इसके अलावा एसिड बेचने वाले दुकानदारों को खरीददार का फोटो आइडेंटिटी कार्ड और ऐड्रेस लेना होता था ताकि ट्रेस किया जा सके। लक्ष्मी के केस में आरोपी को 10 साल की सजा मिली आरोपी को अपने किए का कोई भी पछतावा नहीं था वह शादी करने को लक्ष्मी से तैयार था।
लक्ष्मी अग्रवाल (सोशल मीडिया)
लक्ष्मी अग्रवाल, एसिड सर्वाइवर होने के साथ ही उन महिलाओ के लिए मदद करती है काम करती है जो इस एसिड अटैक को झेल चुकी है। वह पीड़िताओं को समाज में बिना डर के रहने के लिए प्रोत्साहित करती है। एसिड अटैक के हमले के बाद लक्ष्मी की मुलाकात आलोक दीक्षित से हुई थी जो एसिड अटैक को लेकर एनजीओ चलाते थे। लक्ष्मी और आलोक को दोस्ती के बाद प्यार हो गया और वे दोनों बिना शादी के लिव इन में रहे। इस दौरान उनकी एक बेटी हुई जिसका नाम पीहू है। लेकिन अब आलोक और लक्ष्मी अलग रहते है। लक्ष्मी अग्रवाल अपनी बेटी के साथ सिंगल मदर बनकर रहती है। उनकी इस कहानी पर फिल्म छपाक भी बन चुकी है जिसमें दीपिका पादुकोण ( Deepika Padukone)ने लक्ष्मी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म को काफी सराहा गया।






