
सर्दियों में थर्मल पहनता व्यक्ति (सौ. एआई)
Winter Clothing Tips: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का सितम जारी है लेकिन क्या आप भारी-भरकम थर्मल पहनने के बाद भी ठिठुर रहे हैं। दरअसल थर्मल वियर का मकसद सिर्फ शरीर को ढंकना नहीं बल्कि गर्मी को कैद करना है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग इसे पहनने के बुनियादी नियम में ही गलती कर देते हैं।
जब तापमान शून्य के करीब पहुंचता है तो हम सबसे पहले थर्मल वियर का सहारा लेते हैं। लेकिन अक्सर शिकायत रहती है कि दो-दो थर्मल पहनने के बाद भी शरीर में कंपकंपी बनी रहती है। इसका कारण कपड़े की क्वालिटी नहीं बल्कि उसे पहनने का गलत तरीका है।
ढीले थर्मल का चुनाव ज्यादातर लोग आराम के चक्कर में थोड़े ढीले थर्मल खरीद लेते हैं जो सबसे बड़ी गलती है। थर्मल का मुख्य काम ट्रैप्ड एयर के जरिए शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोकना है। अगर थर्मल आपकी स्किन से चिपका हुआ नहीं है तो ठंडी हवा और शरीर के बीच एक गैप बन जाता है जिससे थर्मल का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।
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लेयरिंग का थ्री-लेयर रूल ठंड से बचने के लिए विशेषज्ञ 3 लेयर फॉर्मूले की सलाह देते हैं।
बेस लेयर (थर्मल): यह सीधे त्वचा के संपर्क में होना चाहिए। इसका काम पसीने को सोखना और शरीर की गर्मी को त्वचा के पास रखना है।
मिडिल लेयर (स्वेटर या फ्लीस): यह लेयर इंसुलेशन का काम करती है। यह बेस लेयर द्वारा छोड़ी गई गर्मी को रोक कर रखती है।
आउटर लेयर (जैकेट): यह आपको बाहर की बर्फीली हवाओं और नमी से बचाती है।
सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन सर्दियों में पसीना आना भी ठंड लगने की बड़ी वजह है। अगर आपका थर्मल कॉटन का है तो वह पसीना सोखकर गीला हो जाता है और शरीर को ठंडा करने लगता है। इसलिए हमेशा सिंथेटिक या मेरिनो वूल वाले थर्मल चुनें जो नमी को सोख कर शरीर को सूखा रखते हैं।
अगली बार जब आप बाहर निकलें तो सुनिश्चित करें कि आपका थर्मल आपकी स्किन से बिल्कुल फिट है। सही फिटिंग ही आपको बिना भारी-भरकम जैकेट जैसा गर्म रखेगी।






