Pongal 2026: सिर्फ त्यौहार नहीं प्रकृति का आभार है पोंगल! जानें क्यों मटके से दूध का उफनना माना जाता है शुभ

Pongal Significance: पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख पर्व है जिसे फसल और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन दूध का उफनना या निकलना शुभ माना जाता है।
Pongal Tradition of Milk Boiling in Pot
पोंगल के मौके पर मटके में उफनता दूध
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Pongal Tradition Significance: दक्षिण भारत का सबसे बड़ा उत्सव पोंगल नई फसल और खुशहाली का प्रतीक है। पंचांग के अनुसार इस साल पोंगल 14 जनवरी 2026 से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। इस दिन मिट्टी के नए मटके में दूध और चावल पकाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मटके से दूध का उफनकर बाहर गिरना आपकी समृद्धि का संकेत है। आइए जानते हैं इस अद्भुत परंपरा के पीछे का विज्ञान और महत्व।

जैसे ही सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं दक्षिण भारत के कोने-कोने में पोंगल-ओ-पोंगल की गूंज सुनाई देने लगती है। पोंगल का शाब्दिक अर्थ होता है उबलना या उफान। यह पर्व मुख्य रूप से किसानों का त्यौहार है जो अपनी फसलों के लिए सूर्य, इंद्र देव और पशुधन का आभार प्रकट करते हैं। इस उत्सव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है पोंगल डिश को तैयार करना।

दूध के उफनने का क्या है संकेत?

पोंगल उत्सव के दिन आंगन में मिट्टी के नए बर्तन (कलश) में नए कटे हुए चावल, दूध और गुड़ डालकर पकाया जाता है। परंपरा के अनुसार जब यह मिश्रण उबलकर बर्तन के किनारों से बाहर गिरने लगता है तो घर की महिलाएं शंख बजाती हैं और खुशी से चिल्लाती हैं। माना जाता है कि दूध का उफान जिस दिशा में गिरता है वह परिवार के भविष्य और समृद्धि का संकेत देता है। यदि दूध पूर्व की ओर गिरता है तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है जिसका अर्थ है कि पूरे साल घर में धन और खुशहाली की वर्षा होगी।

प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)

प्रकृति और सूर्य का आभार

पोंगल का त्यौहार चार दिनों तक चलता है जिसमें पहले दिन भोगी पर पुरानी चीजों का त्याग किया जाता है और दूसरे दिन थाई पोंगल पर सूर्य की पूजा होती है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि हमारी हर सुख-सुविधा प्रकृति की देन है। पोंगल का उबलता हुआ दूध हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के विस्तार का प्रतीक है।

मट्टू पोंगल: पशुधन की पूजा

तीसरे दिन मट्टू पोंगल मनाया जाता है जो विशेष रूप से बैलों और गायों को समर्पित है। खेती में मदद करने वाले इन मूक पशुओं को सजाया जाता है और उनकी आरती उतारी जाती है। यह उत्सव इंसान और जानवरों के बीच के अटूट रिश्ते को दर्शाता है।

सेहत और स्वाद का संगम

पोंगल पर बनने वाली खिचड़ी (वेन पोंगल या शक्कर पोंगल) स्वास्थ्य के नजरिए से भी बेहतरीन है। नए चावल, मूंग दाल और घी का यह मेल शरीर को ऊर्जा देता है और पाचन के लिए हल्का होता है।

पोंगल का महापर्व हमें सिखाता है कि जब हम प्रकृति का सम्मान करते हैं तो प्रकृति भी हमें प्रचुरता और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देती है। इस वर्ष का पोंगल आपके जीवन में भी समृद्धि का उफान लेकर आए।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और सूचनात्मक उद्देश्यों पर आधारित है। Navbharatlive.com इसमें शामिल किसी भी तथ्य या जानकारी की सत्यता की पुष्टि या दावा नहीं करता है।

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