Deadlift In Gym: 40 के बाद रहना है फिट, तो सीखें डेडलिफ्ट की सही तकनीक, जानिए 3 सबसे असरदार वैरिएशन
Deadlift Technique: जिम में वर्कआउट करना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन इसे सही तकनीक और प्रॉपर फॉर्म में ही करना चाहिए। गलत तकनीक और जरूरत से ज्यादा स्ट्रेन कभी-कभी गंभीर खतरा बन सकता है।
- Written By: रीता राय सागर
डेडलिफ्ट (फोटो.सोशल मीडिया)
Deadlift In Gym: मांशपेशियों में दर्द, खींचाव और किसी भी तरह की तकलीफ होने पर आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस लिए एक्सरसाइज, योग और अन्य फिजिकल एक्टिविटी करके अपने मसल्स को एक्टिव रखना बहुत जरूरी है।
खासकर 40 की उम्र के बाद। डेडलिफ्ट, जिम में होने वाला एक ऐसा वर्कआउट है, जो आपके कंधे, पीठ, पैर और हाथों के मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करती है, लेकिन इस प्रकार के वर्कआउट को ट्रेनर या कोच की निगरानी में ही करनी चाहिए।
तीन प्रकार के डेडलिफ्ट से मिल सकता है पूरा लाभ
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सूमो डेडलिफ्ट
यह डेडलिफ्ट आपकी मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। यह क्वाड्रिसेप्स, ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों को मजबूती देता है। यह मुद्रा रेगुलर डेडलिफ्ट की तुलना में अधिक असरदार है। यह मांसपेशियों पर ज्यादा जोर देता है, जो आमतौर पर हैमस्ट्रिंग और पीठ के निचले हिस्से को मजबूत कर सकता है। सूमो डेडलिफ्ट फर्श से शुरू होता है और शुरुआत से ही मांसपेशियां को सक्रिय करता है।
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रेगुलर डेडलिफ्ट
रेगुलर या कन्वेंशनल डेडलिफ्ट के लगातार अभ्यास से हैमस्ट्रिंग यानी जांघों के पीछे के हिस्से को मजबूती देता है। आपके हैमस्ट्रिंग, पीठ के निचले हिस्से और ग्लूट्स को टारगेट करने में यह डेडलिफ्ट कारगर है। यह मुद्रा एक ही समय में कई मांसपेशियों पर काम करता है। शरीर के कई हिस्सों में ताकत और मांशपेशियों के निर्माण के लिए अच्छा माना जाता है। यह पेट और हिप्स के पास जमी चर्बी को कम करने में भी हेल्प करता है। यह डेडलिफ्ट फर्श से शुरू होती है, जो जमीन से ऊपर तक की मांसपेशियों को टारगेट करती हैं।
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रोमानियन डेडलिफ्ट
रोमानियाई डेडलिफ्ट (RDL) एक बारबेल लिफ्ट है। यह आपके क्वाड्स, ग्लूट्स, और हैमस्ट्रिंग के साथ-साथ कोर, हाथों और पीठ की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है। इसे करने से पीठ दर्द, शरीर का लचीलापन और पॉश्चर में सुधार होता है। आरडीएल जमीन से नहीं बल्कि घुटनों से शुरू होता है।
रोमानियन डेडलिफ्ट (फोटो. सोशल मीडिया)
डेडलिफ्ट से होने वाले फायदे
- हड्डियां मजूबत होती हैं।
- शरीर की मुद्रा बेहतर होती है।
- हिप एक्सटेंसर एक्टिव होते हैं।
- मसल ग्रोथ में बढ़ोतरी होती है।
- ग्रीप मजबूत होती है।
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जिम में बेल्ट पहनना है जरूरी
जिम में वर्कआउट के दौरान सेफ्टी बेल्ट पहनना बहुत जरूरी होता है। सेफ्टी बेल्ट भारी वजन उठाने के दौरान रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट देने का काम करता है, जिससे चोट लगने का खतरा कम होता है। सेफ्टी बेल्ट पहनने से रीढ़ की हड्डी के ज्यादा मुड़ने या झुकने का जोखिम कम होता है। साथ ही सेफ्टी बेल्ड पेट को भी थामे रखता है। प्रेग्नेंट महिलाओं या प्रेग्नेंसी के बाद जिम जॉइन करने वाली महिलाओं को एक्सपर्ट की देखरेख में ही इसे परफॉर्म करना चाहिए।
