उमर अब्दुल्ला पर भाजपा का तीखा हमला, कहा- ISI को खुश करने वाली राजनीति कर रहे

BJP नेता तरुण चुग ने उमर अब्दुल्ला पर ISI को खुश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रस्ताव भ्रामक और पाकिस्तान के हितों को बढ़ावा देता है। चुग ने कहा कि उमर अब्दुल्ला स्वार्थी राजनीति कर रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला पर भाजपा का हमला, कहा- ISI को खुश करने वाली राजनीति कर रहे
जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला व भाजपा नेता तरुण चुग (फोटो- सोशल मीडिया)
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चालू हो गया है। इस बार भाजपा नेता तरुण चुग ने उमर अब्दुल्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को खुश करने के लिए राजनीतिक खेल खेल रहे हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश किए गए प्रस्ताव को लेकर तरुण चुग ने कहा कि यह न केवल भ्रामक है, बल्कि भारत विरोधी ताकतों को बल देने वाला भी है। उन्होंने उमर की चुप्पी और राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को राजनीतिक अवसरवाद करार देते हुए देश के साथ विश्वासघात बताया।

भाजपा महासचिव ने कहा कि जिस समय देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की मांग कर रहा है, उस समय उमर अब्दुल्ला का यह रुख न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि आतंक के विरुद्ध चल रही लड़ाई को कमजोर करने वाला है। चुग ने सवाल उठाया कि प्रस्ताव में न तो ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की गई और न ही पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा प्रायोजित आतंकवाद की निंदा की गई। उन्होंने इसे राष्ट्रविरोधी ताकतों के समर्थन की तरह बताया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्ताव को बताया भ्रामक

भाजपा नेता तरुण चुग ने नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा पारित उस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें पाकिस्तान से बातचीत और जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा देने की बात कही गई है। उन्होंने इसे न सिर्फ भ्रामक, बल्कि ISI के हित में बताया। चुग का कहना है कि प्रस्ताव में न तो हालिया ऑपरेशन सिंदूर की प्रशंसा की गई, न ही सीमा पार से आतंकवाद फैलाने वाली ताकतों की निंदा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला राजनीतिक लाभ के लिए आतंक पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं।

आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते

तरुण चुग ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे दलों को इस समय आतंकवाद के खिलाफ केंद्र और सशस्त्र बलों के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते और ऐसे प्रस्ताव केवल भारत विरोधी ताकतों को बढ़ावा देते हैं। उमर अब्दुल्ला की हालिया बयानबाजी को उन्होंने तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति बताया, जिससे देश की एकता और सुरक्षा को सीधा खतरा हो सकता है।

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