अब लुटेंगे नहीं बल्कि तरक्की की राह पर दौड़ेगा घाटी का हर नागरिक, उमर अब्दुल्ला बोले- अब कश्मीर का सफर बदलेगा

उमर अब्दुल्ला ने चिनाब ब्रिज के उद्घाटन पर खुशी जताते हुए यह भी कहा कि वे जब स्कूल में थे तब इसकी शुरुआत हुई थी। उनका कहना है कि ये सुविधा केवल रेल संपर्क नहीं है, बल्कि कश्मीरियों को लूट से बचाने का कारगर रास्ता है।
चिनाब ब्रिज से बदलेगा कश्मीर का सफर, अब लुटेंगे नहीं बल्कि तरक्की की राह पर दौड़ेगा घाटी का हर नागरिक
जम्मू-कश्मीर सीएम उमर अब्दुला (फोटो- सोशल मीडिया)
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की बदलती तस्वीर को रफ्तार देने वाला एक ऐतिहासिक कदम पूरा हो गया है। दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज और कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन के उद्घाटन के साथ केंद्र शासित प्रदेश को देश से स्थायी रूप से जोड़ दिया गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भावुक होकर कहा कि जब ये प्रोजेक्ट शुरू हुआ, तब वो स्कूल में पढ़ते थे और अब उनके बच्चे भी स्कूल कॉलेज करके नौकरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सुविधा केवल रेल संपर्क नहीं है, बल्कि कश्मीरियों को लूट से बचाने और उनके फल-सब्जियों को बाजार तक पहुंचाने के लिए एक सुगम और नया जरिया है।

चिनाब ब्रिज और नई ट्रेन सेवा केवल पर्यटन को ही नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबार को भी मजबूती देंगी। भारी बर्फबारी के दौरान जब सड़कों से संपर्क टूट जाता है, तब हवाई सेवाएं महंगी हो जाती थीं और आम लोग ठगे जाते थे। लेकिन अब रेल कनेक्टिविटी से इस तरह की मुश्किलें खत्म होंगी। सेब, चेरी और सूखे मेवे जैसे उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों तक समय पर पहुंच पाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

अब कश्मीरी नहीं होंगे लूट का शिकार

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चिनाब ब्रिज के शुरू होने से जहां एक ओर आवागमन सुगम होगा, वहीं दूसरी ओर बर्फबारी के कारण सड़कों के बंद हो जाने से जो मुश्किलें होती थीं, वे भी दूर होंगी। अब रेल के जरिए लोग सस्ते और सुरक्षित सफर कर सकेंगे। इससे वे दिनों की ठगी से बचेंगे, जब हवाई टिकट की कीमतें अचानक पांच गुना तक बढ़ जाती थीं। ये कनेक्टिविटी अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में राहत लेकर आई है।

ब्रिज से लेकर बयान तक, घाटी में बदलाव का संकेत

इस अवसर पर दिए गए कुछ अन्य बयानों ने भी ध्यान खींचा। कहा गया कि यह प्रोजेक्ट इतने लंबे समय से अटका हुआ था कि जब इसकी शुरुआत हुई थी, तब लोग स्कूल में पढ़ते थे और अब उनके बच्चे काम करने लगे हैं। अब जाकर यह सपना साकार हुआ है। इसके साथ ही यह उम्मीद भी जगी है कि आने वाले समय में घाटी के लोगों को बेहतर और सुलभ सुविधाएं मिलेंगी।

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