ओला, उबर और रैपिडो की आज महा-हड़ताल...घर से निकलने से पहले जान लें कब तक नहीं मिलेगी सर्विस, नहीं होगी परेशानी

Rapido Drivers Strike: आज 7 फरवरी को ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवरों ने हड़ताल की है, जिसमें किराए की कमी और प्राइवेट गाड़ियों के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है।
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ओला, उबर और रैपिडो ड्राइवर्स की हड़ताल (सोर्स- सोशल मीडिया )
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All India Breakdown News: आज, 7 फरवरी को पूरे भारत में ऐप-आधारित राइड प्लेटफॉर्म ओला, उबर और रैपिडो के ड्राइवरों ने हड़ताल का आह्वान किया है। इसे ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ कहा गया है। हड़ताल छह घंटे तक चलेगी और इससे यात्रियों के ट्रैवल प्लान पर असर पड़ सकता है। ड्राइवरों की यह हड़ताल मिनिमम किराए के अभाव और कमर्शिययूल राइड के लिए प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल पर कड़े नियम लागू करने की मांग को लेकर की गई है।

क्यों हो रही है हड़ताल?

यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और अन्य नेशनल लेबर बॉडीज ने मिलकर की है। यूनियन का कहना है कि ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ड्राइवरों और वर्कर्स के लिए कोई तय मिनिमम किराया नहीं है। कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय कर रही हैं, जिससे ड्राइवरों की आय अस्थिर और अनिश्चित हो गई है। यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर देश भर में ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स की समस्याओं को उठाया है। यूनियन का कहना है कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 पहले से लागू हैं, लेकिन प्लेटफॉर्म इनका पालन नहीं कर रहे हैं और खुद ही किराया तय कर रहे हैं। इस वजह से ड्राइवरों की आमदनी घट गई है और रोजी-रोटी के साधनों पर दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा, कमर्शियल राइड के लिए प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल से लाइसेंसधारी ड्राइवरों को गलत प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

यूनियन की मुख्य मांगें

यूनियन ने दो प्रमुख मांगें उठाई हैं। पहली मांग है कि ऑटो, कैब, बाइक टैक्सी और अन्य एग्रीगेटर-बेस्ड सेवाओं के लिए मिनिमम बेस किराए का तुरंत नोटिफिकेशन जारी किया जाए। इन किराए को ड्राइवर और वर्कर यूनियनों की सलाह से तय किया जाना चाहिए और मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

दूसरी मांग है कि कमर्शियल पैसेंजर और गुड्स ट्रांसपोर्ट के लिए प्राइवेट, नॉन-कमर्शियल गाड़ियों के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई जाए। यूनियन के अनुसार, इस प्रैक्टिस से लाइसेंसधारी ड्राइवरों को नुकसान हो रहा है और सेक्टर में आय पर दबाव बढ़ रहा है। इस हड़ताल के दौरान यात्री अपने ट्रैवल प्लान में बदलाव या देरी का सामना कर सकते हैं। ड्राइवरों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे इस तरह की कार्रवाई करते रहेंगे, ताकि उनके अधिकार और आय सुरक्षित हो सकें।

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