बार-बार चेतावनी के बाद भी नहीं बदली मशीनें, बनीं 40 मौतों की वजह; FIR में खुलासा

तेलंगाना में फार्मा फैक्ट्री में धमाका कर्मचारियों की चेतावनी के बावजूद पुरानी मशीनरी न बदलने से हुआ। हादसे में 40 की मौत, 33 घायल हुए; FIR में कंपनी की लापरवाही को उजागर किया गया है।
तेलंगाना फार्मा विस्फोट: पुरानी मशीनों पर चलता रहा काम, 40 मौतों के बाद एफआईआर में खुली लापरवाही की परतें
तेलंगाना फैक्ट्री ब्लास्ट (फोटो- सोशल मीडिया)
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तेलंगाना के सांगारेड्डी जिले में सिगाची इंडस्ट्रीज लिमिटेड के फार्मा प्लांट में हुए भीषण विस्फोट के बाद अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। एफआईआर के अनुसार, कर्मचारियों द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने पुरानी मशीनरी को नहीं बदला, जिससे यह हादसा हुआ। इस त्रासदी में अब तक 40 लोगों की जान जा चुकी है और 33 से अधिक लोग घायल हैं। मृतकों में कई ऐसे कर्मचारी थे जो बीते दो दशकों से यहां कार्यरत थे।

पीड़ित परिवारों ने कंपनी पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता यशवंत राजानाला, जिनके पिता वेंकट जगन मोहन कंपनी में 20 साल से काम कर रहे थे, ने बताया कि उनके पिता ने कई बार मशीनों की खराब हालत को लेकर चिंता जताई थी, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी। हादसे के दिन यशवंत को फोन पर चाचा ने बताया कि प्लांट में विस्फोट हुआ है। जब वे अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें पिता का शव मिला। यह घटना न केवल तकनीकी लापरवाही की गवाही देती है, बल्कि प्रशासनिक अनदेखी का भी सबूत बन चुकी है।

एनओसी और सेफ्टी सिस्टम की पूरी तरह अनदेखी

तेलंगाना अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी के प्लांट के पास फायर एनओसी तक नहीं थी। न तो फायर अलार्म लगे थे और न ही हीट सेंसर जैसे कोई जरूरी सेफ्टी उपकरण। ये सभी लापरवाहियां मिलकर इस भीषण विस्फोट की वजह बनीं। प्लांट में आपात स्थिति से निपटने के कोई उपाय नहीं थे। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 110 और 117 के तहत दर्ज की गई है।

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जिम्मेदारियों से बच नहीं सकेगा प्रबंधन

एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी प्रबंधन को कई बार लिखित और मौखिक रूप से चेतावनी दे चुके थे। लेकिन कंपनी ने मशीनरी को अपडेट करने के बजाय जोखिम उठाना चुना। यह घटना अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही दोषियों की गिरफ्तारी और मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। तेलंगाना फायर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कंपनी के पास सुरक्षा के लिए जरूरी एनओसी नहीं थी और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं थी। कंपनी के प्लांट में फायर अलार्म, हीट सेंसर आदि भी नहीं थे।

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