Pune Land Scam में बड़ा झटका, अदालत ने मानी पद के दुरुपयोग की बात

Pune Land Scam: मुंढवा पार्थ पवार जमीन घोटाले में कोर्ट ने निलंबित ज्वाइंट सब-रजिस्ट्रार की जमानत खारिज की। अदालत ने इसे सुनियोजित और संगठित भ्रष्टाचार करार दिया।
Pune Land Scam
पुणे लैंड स्कैम (AI Generated photo)
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Parth Pawar Land Scam News: मुंढवा पार्थ पवार जमीन घोटाले में पार्थ के लिए एक के बाद एक नई परेशानियां जन्म ले रही हैं। एक बार फिर से पार्थ की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

ताजा मामले में इसी जमीन घोटाले में गिरफ्तार निलंबित ज्वाइंट सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू की पुणे की अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।

अदालत ने अपने आदेश में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला मात्र प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया, योजनाबद्ध और संगठित भ्रष्टाचार सा प्रतीत हो रहा है। अदालत के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है, ऐसे में आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा।

सुनियोजित प्रक्रिया

अदालत ने यह भी संज्ञान में लिया कि लगभग 294 करोड़ के भूमि सौदे को महज 500 रुपये के स्टांप पेपर पर पंजीकृत किया गया। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में टिप्पणी की कि इतनी बड़ी राशि के लेनदेन में इस तरह का पंजीकरण किसी भी स्थिति में क्लेरिकल एर नहीं माना जा सकता, यह एक सुनियोजित प्रक्रिया प्रतीत होती है, जिसके जरिए राज्य को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

पद का गलत इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि इस सौदे के माध्यम से करीब 21 करोड़ की स्टांप ड्यूटी की चोरी की गई, अदालत ने माना कि इससे राज्य के राजस्व को सीधा और गंभीर नुकसान हुआ है। आदेश में यह उल्लेख किया गया कि संबंधित भूमि के 7/12 रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से सरकारी स्वामित्व दर्ज था।

इसके बावजूद न तो आवश्यक एनओसी ली गई, न ही अनिवार्य अनुमतियां प्राप्त की गई और न ही दस्तावेजों का वास्तविक सत्यापन किया गया। अदालत ने कहा कि आरोपी का यह कृत्य केचल लापरवाही नहीं, बल्कि आधिकारिक पद के दुरुपयोग और अन्य लोगों के साथ सक्रिय मिलीभगत का संकेत देता है।

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