तेलंगाना में हैवानियत की हदें पार! चुनाव जीतने के लिए 600 कुत्तों को जहर देकर मारा, 7 सरपंचों समेत 15 पर FIR

Telangana Animal Cruelty Case: तेलंगाना के कामारेड्डी जिले में पंचायत चुनाव का वादा पूरा करने के लिए 600 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया। पुलिस ने सरपंचों सहित 15 लोगों पर मामला दर्ज किया है।
Telangana Stray Dogs Killed
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Telangana 600 Stray Dogs Killed: तेलंगाना के कामारेड्डी और हनमकोंडा जिलों से पशु क्रूरता का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय सरपंचों ने आवारा कुत्तों के आतंक को खत्म करने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए सैकड़ों बेजुबानों की बेरहमी से सामूहिक हत्या कर दी, जिससे पूरे राज्य में आक्रोश है।

तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के माचेरेड्डी मंडल के अंतर्गत आने वाले फरीदपेट, भवानीपेट, वाडी और पलवंचा जैसे गांवों में इंसानी क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। स्रोतों के अनुसार, इन इलाकों में बीते कुछ दिनों के भीतर करीब 500 से 600 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर जहर देकर मार डाला गया। आरोप है कि दिसंबर 2025 में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान नवनिर्वाचित सरपंचों ने ग्रामीणों से वादा किया था कि वे गांव को आवारा कुत्तों और बंदरों के आतंक से मुक्त कराएंगे।, इसी "शॉर्टकट" को अपनाते हुए उन्होंने कुत्तों के खाने में जहर मिला दिया या जहरीले इंजेक्शन के जरिए उन्हें मौत के घाट उतार दिया।

साक्ष्य छिपाने के लिए गुपचुप तरीके से दफनाए गए शव

इस भयावह हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सबूतों को मिटाने के लिए कुत्तों की लाशों को गांवों के बाहरी इलाकों में चुपचाप दफना दिया गया था।, इस मामले का खुलासा तब हुआ जब 'गौतम स्ट्रे एनिमल्स फाउंडेशन' और 'स्ट्रे एनिमल्स फाउंडेशन इंडिया' (SAFI) के कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लगी। पशु अधिकार कार्यकर्ता अदुलापुरम गौतम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और डॉक्टरों की टीम ने दफन किए गए शवों को बाहर निकाला और उनका पोस्टमॉर्टम किया।

7 सरपंचों समेत 15 लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई

कामारेड्डी और हनमकोंडा पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 7 ग्रामों के सरपंचों सहित कुल 15 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है।, हनमकोंडा जिले के श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में भी ऐसी ही घटनाएं सामने आईं, जहां 300 से अधिक कुत्तों को मारा गया था। जांच के दौरान विसरा के सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं ताकि मौत के सटीक जहरीले तत्व की जानकारी मिल सके।

कानून और सुप्रीम कोर्ट की मर्यादा का उल्लंघन

यह घटना उस समय हुई है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए 'पशु जन्म नियंत्रण' नियमों का पालन करना चाहिए, न कि उन्हें खत्म करना चाहिए। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत इस तरह बेजुबानों की हत्या करना न केवल अनैतिक है बल्कि एक दंडनीय अपराध भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नसबंदी और टीकाकरण जैसे सरकारी उपायों को लागू करने के बजाय सामूहिक हत्या का रास्ता चुनना प्रशासन और स्थानीय नेतृत्व की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

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