

Telangana Government Salary Dispute: एक बार यदि मनमाने तौर पर वेतन बढ़ा दिया जाए तो फिर कम नहीं किया जा सकता। कांग्रेस शासित तेलंगाना में सरकारी कर्मचारियों को काफी मोटी रकम तनख्वाह के रूप में दी जा रही है जिसका राज्य की तिजोरी पर बोझ आ रहा है लेकिन यह भी तो विचार किया जाना चाहिए कि इसके पीछे कारण क्या है? राज्य में 3 दशक से अधिक सेवा दे चुके ड्राइवर और सफाई कर्मी को प्रतिमाह 2 लाख रुपए तथा मुख्य इंजीनियरों को हर माह 7 लाख रुपए वेतन दिया जा रहा है।
2014 में जब आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना था तब राज्य का वेतन-पेंशन पर मासिक खर्च 1500 करोड़ रुपए था जो अब चौगुना अर्थात 6,000 करोड़ रुपए हो गया है। इसका अर्थ यही हुआ कि तेलंगाना में वित्तीय अनुशासन का अभाव है।
एक ओर व्यापक स्तर पर बेरोजगारी है तो दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले है। राज्य के मुख्य सचिव के। रामकृष्ण राव के अनुसार 300 प्रतिशत की वेतनवृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण चुनावों के साथ-साथ होने वाले वेतन संशोधन हैं। चुनाव के समय प्रशासनिक मशीनरी को खुश या संतुष्ट रखने के लिए वेतनमान बढ़ा दिया जाता है। ग्रेटर हैदराबाद नगरनिगम में जो 2 प्रतिशत स्थायी सफाई कर्मी हैं, उन्हें भत्तों के अतिरिक्त प्रतिमाह औसतन 70,000 रुपए मिलते हैं। ऐसे वेतनमान से सामाजिक असमानता बढ़ती है तथा असंतोष पनपता है।
यह आश्चर्य व चिंता की बात है कि तेलंगाना के सार्वजनिक उपक्रमों में वेतन इतना अधिक हो गया है कि उसने राज्यपाल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को मिलनेवाले वेतन को भी पीछे छोड़ दिया है। एक समय वह भी था जब राज्यों में राज्यपाल व केंद्र में राष्ट्रपति से अधिक वेतन किसी को नहीं दिया जाता था ताकि इन उच्च्च संवैधानिक पदों की गरिमा बनी रहे। वेतन से जुड़ी आउटपुट को देखा जाना चाहिए कि क्या कर्मचारी उसे मिलनेवाले ऊंचे वेतन के अनुरूप जिम्मेदारी से काम करता है या निठल्ला है! मोटा वेतन लेनेवाले नियमित सफाई कर्मी अपनी जगह किसी ऐवजदार को कम पैसा देकर काम पर भेज देते हैं।
तेलंगाना में हर 4 वर्ष बाद बिजली कर्मचारियों का वेतनमान संशोधित किया जाता है इसलिए वहां वेतन बढ़ता ही चला जाता है। खर्च बढ़ने से बिजली दर भी महंगी कर दी जाती है जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। बेरोजगारी की समस्या हल करनी हो तो पुराने कर्मचारियों को वीआरएस देकर नए लोगों की नियुक्ति करनी चाहिए, एंट्री लेवल में नए कर्मचारी का वेतन कम रहेगा, इससे सरकार की बचत होगी, 1 लाख रुपए महीने का एक कर्मचारी रखने की बजाय 50,000 वेतन वाले 2 कर्मचारी रखे जा सकते हैं। न केवल तेलंगाना बल्कि अन्य राज्यों में भी संतुलित वेतन नीति निर्धारित की जानी चाहिए और वेतन को काम की गुणवत्ता से जोड़ा जाना चाहिए।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा