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स्टालिन के आगे राहुल ने टेके घुटने? DMK के लिए अपनों को दी नसीहत, तमिलनाडु में क्या है कांग्रेस की मजबूरी?
- Written By: अभिषेक सिंह
Tamil Nadu Assembly Election: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। अधिकतर राज्यों में कमजोर होती जा रही कांग्रेस दक्षिण में सरकार का हिस्सा बन खुद को एक बार फिर मजबूत करने की उम्मीद कर रही है।

राहुल गांधी व एमके स्टालिन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं। वहीं, ज्यादातर राज्यों में कमजोर होती जा रही कांग्रेस दक्षिण में सरकार का हिस्सा बनकर खुद को एक बार फिर मजबूत करने की उम्मीद कर रही है। कांग्रेस गठबंधन के जरिए तमिलनाडु में सत्ता में आना चाहती है, यह एक ऐसी रणनीति है जिस पर उसकी टॉप लीडरशिप चर्चा कर रही है।
तमिलनाडु कांग्रेस के एक गुट का मानना है कि उसे द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) के साथ सरकार का हिस्सा बनना चाहिए। हालांकि, DMK सत्ता साझा करने को तैयार नहीं है। कांग्रेस ने अपने राज्य नेताओं से अनुशासन बनाए रखने की अपील की है और चुनाव रणनीति से जुड़े मामलों पर गैर-ज़रूरी बयान देने से बचने के लिए साफ निर्देश जारी किए हैं।
राहुल-खड़गे ने की बड़ी बैठक
शनिवार को पार्टी के इंदिरा भवन मुख्यालय में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। बैठक में पूर्व पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव और संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल, तमिलनाडु पार्टी प्रभारी गिरीश चोडणकर, राज्य इकाई अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगाई और सांसद पी. चिदंबरम, मणिक्कम टैगोर और कार्ति चिदंबरम सरीखे दिग्गज नेता शामिल हुए।
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बैठक के बाद क्या बोले खड़गे?
बैठक के बाद खड़गे ने कहा, “हमने तमिलनाडु के अपने नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हमें विश्वास है कि तमिलनाडु के लोग संघ-भाजपा की कट्टरता, सांप्रदायिकता, संघ-विरोधी और भेदभावपूर्ण राजनीति के बजाय समानता, सामाजिक न्याय, सशक्तिकरण और सुशासन को चुनेंगे। कांग्रेस राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।”
क्या कहता है सियासी इतिहास?
तमिलनाडु में कांग्रेस के लिए मुख्य चिंता DMK के साथ गठबंधन की शर्तें हैं। पार्टी लंबे समय से राज्य में सत्ता से बाहर है। 1967 से सत्ता लगातार DMK और AIADMK के बीच बदलती रही है, लेकिन कांग्रेस को सत्ता में हिस्सा नहीं मिला है। कांग्रेस की राज्य इकाई अब सरकार में हिस्सा चाहती है।
डीएमके ने किया साफ इनकार
अगर DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन जीतता है तो कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री पद और अन्य महत्वपूर्ण पद चाहती है। DMK ने यह साफ कर दिया है कि तमिलनाडु में ऐसी कोई परंपरा नहीं है। कोई गठबंधन सरकार नहीं होगी; DMK अकेले सरकार चलाएगी। कई DMK नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह बात कही है।
कांग्रेस के आगे कौन सी चुनौती?
तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं। 2021 में कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ 25 सीटें जीती थीं, जिनमें से 18 पर उन्हें आसानी से जीत मिली थी। अब कांग्रेस 35-40 सीटों की मांग कर रही है। DMK कांग्रेस को ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं है। इस हिचकिचाहट का एक कारण यह डर है कि अगर कांग्रेस को ज्यादा सीटें दी गईं और वे उन्हें जीतने में कामयाब हो गईं, तो सरकार में हिस्सेदारी के लिए उनकी मांग और मजबूत हो जाएगी।
कांग्रेस-डीएमके पॉलिटिक्स (इन्फोग्राफिक-AI)
प्रवीण चक्रवर्ती, मणिक्कम टैगोर, गिरीश चोडनकर और सचिन पायलट जैसे नेता यह तर्क दे रहे हैं कि कांग्रेस के पास काफी सीटें हैं, इसलिए उन्हें भी सत्ता में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। कुछ नेताओं ने DMK सरकार के कर्ज़ और वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं, जिससे पार्टी के अंदर तनाव पैदा हो गया है। अब, कांग्रेस नेता चाहते हैं कि अगर DMK सरकार सत्ता में वापस आती है, तो उन्हें सत्ता में हिस्सेदारी की गारंटी दी जाए।
सत्ता में हिस्सेदारी मांगेगी कांग्रेस
ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर 2026 के चुनावों में महागठबंधन सत्ता में आता है, तो कांग्रेस पार्टी सत्ता में हिस्सेदारी की मांग कर सकती है। सांसद मणिक्कम टैगोर, गिरीश चोडनकर और एस. राजेशकुमार सहित कई नेताओं ने राज्य में गठबंधन सरकार की वकालत की है। कांग्रेस अपने लिए मंत्री पद भी चाहती है। गिरीश चोडनकर ने मौजूदा गठबंधन की आलोचना करते हुए यहां तक कहा कि सत्ता में हिस्सेदारी के बिना, कांग्रेस खुद को एक राजनीतिक पार्टी के बजाय एक गैर-सरकारी संगठन के रूप में पेश कर रही है।
विजय के साथ होगा गठबंधन?
दूसरी तरफ तमिलनाडु कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि कांग्रेस को विजय के साथ गठबंधन करना चाहिए। सुपरस्टार विजय तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रहे हैं। कांग्रेस नेता चाहते हैं कि पार्टी सम्मानजनक संख्या में सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) और कांग्रेस के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है।
यह भी पढ़ें: ‘चाणक्य’ की एंट्री और विजय का गेम…क्या स्टालिन की जिद डुबो देगी लुटिया? कांग्रेस की ‘नाराजगी’ ने बढ़ाई टेंशन
स्थानीय कांग्रेस नेता ऐसा इसलिए चाहते हैं क्योंकि DMK नेता आई. पेरियासामी पहले ही साफ कह चुके हैं कि एम.के. स्टालिन महागठबंधन में किसी भी गठबंधन सहयोगी के साथ कोई भी मंत्री पद साझा नहीं करेंगे। कांग्रेस नेता अपने राजनीतिक भविष्य के लिए चाहते हैं कि कांग्रेस आलाकमान अपने समर्थन पर फिर से विचार करे और नई संभावनाओं को तलाशे।
कांग्रेस की असली मजबूरी क्या?
केंद्र में DMK कांग्रेस का समर्थन करती है। राज्य में कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में है। DMK सत्ता साझा नहीं करती क्योंकि उसने लगातार अपने बहुमत से सरकार बनाई है। राज्य में कांग्रेस एक संगठन के रूप में अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। कांग्रेस का वोट बैंक भी सिर्फ 8 से 10 प्रतिशत है। DMK के साथ गठबंधन से वोट ट्रांसफर के ज़रिए कांग्रेस को मदद मिलती है, जिससे कुछ सीटें जीतना आसान हो जाता है।
कांग्रेस के लिए एक और मजबूरी यह है कि DMK ‘इंडिया ब्लॉक’ का हिस्सा है। केंद्र में मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए कांग्रेस को लंबे समय तक राजनीतिक साझेदारों की जरूरत है। 2006 और 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद भी कांग्रेस ने सत्ता में हिस्सेदारी के बिना DMK का समर्थन किया था।
DMK का साथ छोड़ेगी कांग्रेस?
DMK की परंपरा रही है कि वह गठबंधन को चुनाव अवधि तक ही सीमित रखती है गठबंधन सहयोगियों को सरकार में शामिल नहीं किया जाता है। 2026 के चुनावों से पहले कांग्रेस ज्यादा सीटों और सत्ता में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही है, लेकिन DMK साफ इनकार कर रही है। DMK केंद्रीय स्तर पर कांग्रेस के प्रति वफादार रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यही वजह है कि कांग्रेस राज्य में गठबंधन नहीं तोड़ना चाहती।
नेताओं को दी गई कड़ी नसीहत
केसी वेणुगोपाल ने कहा, “टॉप लीडरशिप ने सभी नेताओं की बात धैर्य से सुनी। नेताओं को खुलकर अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया। चर्चा रचनात्मक थी और तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने और उसकी भविष्य की रणनीति पर केंद्रित थी। मीटिंग में सर्वसम्मति से खड़गे और राहुल गांधी को अंतिम फैसले लेने के लिए अधिकृत किया गया।”
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कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को अनुशासन बनाए रखना चाहिए। उन्हें गठबंधन के बारे में बयान देने से बचना चाहिए और सभी अटकलों से दूर रहना चाहिए। उन्हें पार्टी के फैसलों का पालन करना चाहिए। कांग्रेस फिलहाल तमिलनाडु में गठबंधन पर विचार कर रही है। स्थानीय कांग्रेस नेता बड़े INDIA ब्लॉक के तहत DMK के साथ समझौता चाहते हैं।
Frequently Asked Questions
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Que: तमिलनाडु में कांग्रेस DMK से सत्ता में हिस्सेदारी क्यों मांग रही है?
Ans: कांग्रेस का मानना है कि गठबंधन की जीत में उसकी भी भूमिका होती है, इसलिए उसे केवल बाहरी समर्थन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पार्टी लंबे समय से राज्य में सत्ता से बाहर है और संगठन को मजबूत करने के लिए कैबिनेट में हिस्सेदारी को जरूरी मान रही है।
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Que: DMK कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी देने से क्यों इनकार कर रही है?
Ans: DMK का तर्क है कि तमिलनाडु में गठबंधन सरकार की कोई परंपरा नहीं रही है। पार्टी हमेशा अकेले बहुमत से सरकार बनाती रही है और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने साफ कर दिया है कि किसी भी सहयोगी दल को मंत्री पद नहीं दिए जाएंगे।
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Que: अगर DMK नहीं मानी तो कांग्रेस के पास क्या विकल्प हैं?
Ans: कांग्रेस के सामने सीमित विकल्प हैं। कुछ नेता अभिनेता विजय की पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना देख रहे हैं, जबकि केंद्रीय स्तर पर DMK के समर्थन और INDIA ब्लॉक की मजबूरी के चलते कांग्रेस के लिए DMK से नाता तोड़ना आसान नहीं है।
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